गैंगस्टर लॉरेंस विश्नोई पूर्व सरपंच मर्डर केस में बरी:3 को उम्रकैद, 6 को 10-10 साल की सजा; दुकान में घुसकर गोलियों से भूना था

सीकर में पूर्व सरपंच सरदार राव मर्डर केस में करीब 9 साल बाद आज एससी-एसटी कोर्ट ने फैसला सुनाया है। मामले में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और एक अन्य आरोपी को बरी कर दिया गया है। 3 दोषियों को उम्रकैद और 6 को 10-10 साल की सजा सुनाई गई। कोर्ट ने मामले में मंगलवार (13 जनवरी) को आरोपियों को दोषी करार दिया था। लॉरेंस वीसी के माध्यम से जुड़ा था। बाकी को कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट में लाया गया। इसके बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। एडवोकेट रघुनाथ राम सुला ने बताया कि लॉरेंस और यतेंद्रपाल को बरी किया गया है। हरेंद्र, अरुण और हरदेवराम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। बाकी 6 दोषियों को 10 साल की सजा सुनाई गई है। कोर्ट ने मामले में सुभाष बराल को मफरूर (फरार) मानते हुए उसके खिलाफ फैसला नहीं सुनाया है। 14 को किया था गिरफ्तार,संपत नेहरा पर जांच पेंडिंग
पुलिस ने मामले में सुपारी देने वाले हरदेवा राम, गैंगस्टर लॉरेंस विश्नोई, सुभाष मूंड उर्फ सुभाष बराल, ओमप्रकाश मूंड, सुनीत, भानू प्रताप, विजयपाल नागवा, शूटर अंकित व संपत नेहरा, शूटर भेजने वाला रविंद्र सिंह के अलावा मुकेश कुमार, कुलदीप उर्फ बोदू, नरेंद्र कुमार और यतेंद्र पाल को गिरफ्तार किया था। मामले में एक शूटर अंकित भादू का पहले ही पंजाब के मोहाली में एनकाउंटर हो गया था। वहीं संपत नेहरा और इस हत्याकांड के लिए गाड़ी व हथियार उपलब्ध करवाने वाला जग्गू भगवान पुरिया के खिलाफ 173(8) में जांच पेंडिंग है। विजयपाल नागवा, रेडी,रवींद्र, संपत नेहरा और जग्गू भगवान पुरिया (टोटल 5) के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 173(8) में इन्वेस्टिगेशन पेंडिंग है। राजनीतिक रंजिश में गई थी पूर्व सरपंच की जान
सरदार राव साल 2010 से 2014 तक जुराठड़ा के सरपंच रहे थे। इस ग्राम पंचायत में बराल, जुराठड़ा और दूल्हेपुरा गांव आते थे। 2015 में जब चुनाव हुए तो सरदार राव चुनाव हार गए थे। इसके बाद सरकारी टीचर हरदेवा राम का बेटा संदीप सरपंच बना था। सरकारी नौकरी लगने पर संदीप ने सरपंच पद से इस्तीफा दे दिया था। ऐसे में उप चुनाव सितंबर महीने में होना प्रस्तावित था। सरदार राव को दमदार प्रत्याशी माना जा रहा था। वहीं हरदेवा राम भी अपने परिवार के सदस्यों को चुनाव लड़ाने की तैयारी कर रहा था, लेकिन उसे हार का डर था। इसके बाद उसने अजमेर जेल में बंद सुभाष मूंड (बराल) से फोन पर बात कर सरदार राव को मारने की सुपारी दी थी। पुलिस जांच में सामने आया था कि बराल ने गैंगस्टर लॉरेंस से मदद मांगी थी। इसके बाद लॉरेंस के शूटर्स ने 23 अगस्त 2017 में सरदार राव को गोलियों से भून दिया था।

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