दमोह के हटा में हुए चर्चित कांग्रेस नेता देवेंद्र चौरसिया हत्याकांड में जबलपुर हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सबूतों की कमी के चलते मामले के 16 आरोपियों को दोषमुक्त (बरी) कर दिया है। इससे पहले निचली अदालत ने इन आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस हत्याकांड में कुल 23 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा मिली थी, जिसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में अपील की थी। कोर्ट ने पाया कि जिन 16 लोगों को बरी किया गया है, उनके नाम मूल एफआईआर (FIR) में दर्ज नहीं थे। साथ ही, घटना में उनकी क्या भूमिका थी, इस बारे में भी पर्याप्त सबूत नहीं मिले। इसी आधार पर न्यायालय ने उन्हें राहत दी, जबकि अन्य 7 आरोपियों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। क्या था पूरा मामला यह हत्याकांड 15 मार्च 2019 को हुआ था। मामले में कुल 27 लोग आरोपी बनाए गए थे। सुनवाई के दौरान हटा न्यायालय ने 23 आरोपियों को दोषी मानते हुए उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। एफआईआर में मुख्य रूप से चंदू सिंह, गोविंद सिंह, गोलू सिंह, इंद्रपाल पटेल, लोकेश पटेल, श्रीराम शर्मा और अमजद उर्फ डूठा के नाम शामिल थे, जिनकी सजा फिलहाल बरकरार है। पीड़ित पक्ष अब जाएगा सुप्रीम कोर्ट पीड़ित पक्ष के वकील मनीष नगाइच ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे न्याय के लिए अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। उन्होंने बताया कि बरी हुए 16 लोगों के खिलाफ याचिका दायर की जाएगी। साथ ही, जिन 7 आरोपियों की उम्रकैद बरकरार रखी गई है, उनके अपराध की गंभीरता को देखते हुए उन्हें फांसी की सजा देने की मांग भी की जाएगी।


