भास्कर न्यूज | बकावंड जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने तैयारी तेज कर दी है। इसी कड़ी में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बकावंड में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह प्रशिक्षण मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ संजय बसाक एवं जिला मलेरिया अधिकारी डॉ एस एस टेकाम के निर्देश पर तथा खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ हरीश मरकाम के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। प्रशिक्षण का आयोजन राज्य पीसीआई इंडिया के स्टेट कोऑर्डिनेटर मुख्तार अंसारी एवं असिस्टेंट स्टेट को.ऑर्डिनेटर रोहित कुमार द्वारा किया गया। प्रशिक्षण सत्र में फाइलेरिया बीमारी के लक्षण,कारण, बचाव और उपचार की जानकारी दी गई। प्रशिक्षक विश्वकर्मा ने बताया कि फाइलेरिया क्यूलेक्स प्रजाति के मच्छर के काटने से फैलने वाली बीमारी है, जिसे आमतौर पर हाथी पांव कहा जाता है। उन्होंने बताया कि संक्रमित मच्छर के काटने के 10 से 15 वर्ष बाद इस बीमारी के लक्षण सामने आते हैं। जिससे रोग की पहचान देर से होती है। ऐसे में रोकथाम ही सबसे बड़ा उपाय है। प्रशिक्षण में बताया गया कि सामूहिक दवा सेवन ;एमडीए अभियान फाइलेरिया उन्मूलन का सबसे प्रभावी माध्यम है। निर्धारित आयु वर्ग के सभी लोगों को वर्ष में एक बार दवा अनिवार्य रूप से खाना चाहिए। जबकि एक वर्ष से कम उम्र के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को दवा नहीं दी जाती। प्रशिक्षण के दौरान कर्मचारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में व्यापक जनजागरूकता फैलाने, नारा लेखन व रोगियों की पहचान करने की जिम्मेदारी सौंपी गई।


