छोटे स्टॉप डेम से सहेजा जा सकता है कई लाखों लीटर पानी, नहीं लगाए कड़ी शटर

हर साल मानसून से पहले प्रशासन द्वारा जल संरक्षण और जल संवर्धन के लिए अभियान चलाए जाते हैं। पानी की बूंद-बूंद सहेजने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आती है। ग्राम पंचायत क्षेत्रों में बने छोटे स्टॉप डेमों में बारिश के पानी को रोकने की व्यवस्था बेहद कमजोर हैं। नतीजतन हर साल लाखों लीटर पानी बिना उपयोग के बह जाता है। ग्राम पंचायत ने बारिश का दौर थमते के करीब 5 माह बाद भी स्टॉप डेमों में कड़ी शटर नहीं लगा सकी है। वहीं कई स्टॉप डेमों पर लगे लोहे के कड़ी शटर चोरी हो चुके हैं। शटर नहीं होने से पानी रोकना संभव नहीं हो पाता। मानसून के बाद जरूरी है कड़ी शटर जुवाड़ी के किसान हेमंत यादव ने बताया बारिश का दौर थमते ही नदी-नालों में पानी का बहाव कम होने लगता है। ऐसे समय स्टॉप डेमों में कड़ी शटर लगाकर पानी रोकना बेहद जरूरी है, ताकि रबी सीजन में सिंचाई और गर्मी में भूजल स्तर बनाए रखा जा सके। लेकिन पंचायत कड़ी शटर नहीं लगा रही है। वहीं कई स्टॉप डेम से कड़ी शटर चोरी हो चुके हैं। स्टॉप डेम में जमा पानी से दूसरी फसल ली जा सकती है। गेहूं और चने की सिंचाई में काफी मदद मिलती है। भीमपुर चिखली ग्राम पंचायत के किसान रामकिशोर इवने ने बताया गांव में पंचायत ने स्टॉप डेमों तो बना दिए हैं, लेकिन उसमें कड़ी शटर नहीं लगाए हैं। जिससे डेम में पानी नहीं रुक पा रहा है। जुवाड़ी गांव की सचिव चंद्रकला इरपाचे ने पुराने स्टॉप डेम की कई कड़ी शटर जर्जर हो गई है। जल्द ही नई कड़ी शटर लगाई जाएगी। वहीं नदी-नालों में बोरी बंधान कर पानी रोका जा रहा है।

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