GPM कलेक्टर ने स्कूलों का किया निरीक्षण:कहा- 33 प्रतिशत भी नहीं आना शिक्षकों की विफलता, छात्रों की उपस्थिति पर जताई नाराजगी

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में 10वीं-12वीं के खराब बोर्ड परिणामों को देखते हुए कलेक्टर लीना कमलेश मंडावी आगामी परीक्षा परिणाम बेहतर करने लगातार स्कूलों का निरीक्षण कर रही हैं। निरीक्षण के दौरान शिक्षकों-विद्यार्थियों की उपस्थिति, पढ़ाई का स्तर और संसाधनों की स्थिति की समीक्षा की जा रही है। शुक्रवार को कलेक्टर ने जिला पंचायत सीईओ मुकेश रावटे के साथ मरवाही विकासखंड के कई स्कूलों का निरीक्षण किया। इनमें शासकीय हाई स्कूल लरकेनी, करसीवां, मड़वाही, पण्डरी, पीएमश्री स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिन्दी-अंग्रेजी माध्यम विद्यालय और शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मरवाही शामिल रहे। छात्र उपस्थिति और परीक्षा परिणाम पर नाराजगी निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने प्रत्येक स्कूल में शिक्षकों से बैठक कर दर्ज संख्या, वास्तविक उपस्थिति, विषयवार शिक्षक, पदस्थापना तिथि और पिछले बोर्ड परीक्षा परिणामों की जानकारी ली। अधिकांश स्कूलों में विद्यार्थियों की उपस्थिति कम और परीक्षा परिणाम असंतोषजनक पाए गए, जिस पर कलेक्टर ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। 33 प्रतिशत भी नहीं आना शिक्षकों की विफलता- कलेक्टर कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि सालभर पढ़ाने के बाद भी यदि छात्र 33 प्रतिशत अंक नहीं ला पा रहे हैं, तो यह शिक्षकों की विफलता है। उन्होंने शिक्षकों को नैतिक जिम्मेदारी समझते हुए समर्पण भाव से पढ़ाने और लगातार गैरमौजूद छात्रों के अभिभावकों से संपर्क कर उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। परीक्षा नजदीक, अभ्यास और अनुशासन पर जोर कलेक्टर ने कहा कि बोर्ड परीक्षा नजदीक है, ऐसे में बच्चों को लगातार अभ्यास कराया जाए, उन्हें समझाया जाए और शिक्षक अनावश्यक छुट्‌टी न लें। लक्ष्य यह होना चाहिए कि कोई भी छात्र परीक्षा में पिछड़ने न पाए। सेजेस विद्यालय के कमजोर परिणाम पर जताया अफसोस स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय मरवाही में पिछले वर्ष के कमजोर परीक्षा परिणाम पर कलेक्टर ने अफसोस जताया। उन्होंने कहा कि सेजेस स्कूल की अलग पहचान है, जिसे बनाए रखना जरूरी है। खराब परिणाम पर तय होगी विषयवार जिम्मेदारी कलेक्टर ने चेतावनी दी कि यदि इस बार विद्यालय का परिणाम संतोषजनक नहीं रहा, तो विषयवार शिक्षकों की जिम्मेदारी तय की जाएगी और जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि एक भी छात्र अनुत्तीर्ण नहीं होना चाहिए

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