मन ही बंधन और मोक्ष का मूल कारण : स्वामी मोक्षानंद

भास्कर न्यूज | जालंधर ‘मन ही बंधन और मोक्ष के मूल कारणों में से एक है। यह एक समय में केवल एक ही कार्य कर सकता है, इसलिए इसे ईश्वर में लगाना अनिवार्य है।’ उक्त बाते स्वामी मोक्षानंद ने कहीं। मौका था आर्य समाज मंदिर, मॉडल टाउन में बसंत पंचमी के उपलक्ष्य में करवाए गए गायत्री महायज्ञ का। पंडित सत्य प्रकाश शास्त्री और पंडित बुद्धदेव वेदालंकार ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ भक्तों से हवन कुंड में आहुतियां डलवाईं। रश्मि घई ने भजन प्रस्तुत किया। स्वामी मोक्षानंद ने ओम् की भी महिमा बताई। उन्होंने कहा कि वेदादि शास्त्रों के अनुसार, विराट, अग्नि, वायु और हिरण्यगर्भ जैसे अनेक नाम प्रकरण के अनुसार एक परमेश्वर के ही बोधक हैं। उन्होंने विज्ञान और आध्यात्म को जोड़ते हुए बताया कि जहां प्रकाश की गति तेज है, वहीं वह परमात्मा हिरण्यगर्भ रूप में समस्त ब्रह्मांड को अपने भीतर धारण किए हुए है। अंत में स्वामी जी ने जोर दिया कि जैसे यज्ञ (हवन) दुर्गंधयुक्त वायु को शुद्ध करने का एकमात्र साधन है, वैसे ही ईश्वर की भक्ति ही मलिन मन को शुद्ध कर सकती है। यहां अरविंद घई, जोगिंदर भंडारी, ईश्वर चंद्र रामपाल, एसपी सहदेव, रंजीत आर्य, पंडित सुरेश शास्त्री, नीलू खन्ना, पूनम सेठी, डॉक्टर विभा आर्य, किरण महाजन मौजूद रहे।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *