भास्कर न्यूज | जालंधर लाजपत नगर स्थित रेड क्रॉस भवन में जिला प्रशासन 27 से 29 जनवरी तक सखी शक्ति मेला लगाएगा। मेले में रैंप स्कीम और आजीविका मिशन के तहत कार्यरत विभिन्न सेल्फ हेल्प ग्रुप हिस्सा लेंगे। मेले में महिलाओं द्वारा तैयार किए गए घरेलू सामान, हैंडीक्राफ्ट, ऑर्गेनिक उत्पाद, सांस्कृतिक कार्यक्रम और लाइव फूड स्टॉल भी लगाए जाएंगे। इसमें विभिन्न गांवों की वे महिलाएं हिस्सा लेंगी, जिन्होंने ट्रेनिंग लेकर खुद का कारोबार शुरू किया है। उनके द्वारा विभिन्न प्रकार के भी स्टॉल लगाए जाएंगे। मेला रोजाना सुबह नौ से रात 8 बजे तक चलेगा। बता दें पेंडू विकास पंचायत विभाग के अधीन पंजाब राज्य देहाती अजीविका मिशन चलाया जा रहा है, जिसमें गांवों में सेल्फ हेल्प ग्रुप बनाए जाते हैं। इन सेल्फ हेल्प ग्रुपों को आर्थिक सहायता दी जाती है। इसका मकसद गरीबी दूर कर लोगों का आर्थिक स्तर सुधारना है। मेले के शुरू होने से पहले भास्कर ने तीन सेल्फ हेल्प ग्रुप के लोगों से बातचीत की, जिन्होंने अपनी मेहनत से खुद के जीवन को बदला और दूसरी महिलाओं को भी आज वे रोजगार दे रही हैं। गिल गांव निवासी सुमन एक सेल्फ हेल्प ग्रुप संचालित करती हैं, भी इस मेले में हिस्सा लेंगी। इस सेल्फ हेल्प ग्रुप का नाम बेबे नानकी अजीविका सेल्फ हेल्फ ग्रुप है। उनके ग्रुप की ओर से ऑर्गेनिक पिसी हुई हल्दी का स्टॉल लगाया जाएगा। सुमन बताती हैं कि पांच साल पहले उनके ग्रुप की शुरुआत हुई थी, जिसमें महिलाएं थोड़ी-थोड़ी बचत किया करती थीं। इसके बाद ग्रुप सही चलने पर उन्हें फंड मिला, जिससे हल्दी पीसने की मशीन खरीदी गई। यह हल्दी पूरी तरह केमिकल-फ्री होती है। अधिकतर हल्दी ग्रुप की महिलाएं स्वयं अपने खेतों में उगाती हैं और जरूरत पड़ने पर ऐसे किसानों से खरीदी जाती है, जो किसी भी प्रकार के केमिकल का उपयोग नहीं करते। उनके ग्रुप में कुल पांच महिलाएं हैं। हल्दी की प्रोसेसिंग से लेकर पैकेजिंग तक का सारा काम महिलाएं खुद करती हैं। इसके साथ-साथ वे नमकीन सेवियां भी तैयार करती है।, जिससे गांव की अन्य महिलाओं को भी रोजगार मिला है। संतोष कौर द्वारा संचालित सतनाम आजीविका सेल्फ हेल्प ग्रुप की ओर से जूट बैग्स का स्टॉल लगाया जाएगा। संतोष कौर बताती हैं कि उनके द्वारा तैयार किए जाने वाले जूट बैग पूरी तरह हैंडमेड होते हैं, जिन पर अलग-अलग डिजाइन बनाए जाते हैं। ऑर्डर के अनुसार कुछ बैग्स पर पेंटिंग भी की जाती है। वे जूट का कच्चा माल फैक्ट्रियों से मीटर के हिसाब से खरीदती हैं और सिलाई मशीन की मदद से विभिन्न साइज और डिजाइन के बैग तैयार करती हैं। जूट बैग्स की कीमत 50 रुपए से लेकर 400 रुपए तक होती है। वे अपनी दुकान के माध्यम से इन बैग्स की बिक्री करती हैं और औसतन हर महीने करीब 100 बैग तैयार कर बेचती हैं। उनके इस ग्रुप में भी पांच महिलाएं जुड़ी हुई हैं।


