राजस्थान का सरकारी स्वास्थ्य तंत्र ‘वेंटिलेटर’ पर है। प्रदेशभर में एक ओर जहां अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी है, वहीं 930 डॉक्टर एपीओ चल रहे हैं। एपीओ किए गए डॉक्टर अस्पतालों में इलाज करने की बजाय मुख्यालय में फाइलें निपटाने में ‘व्यस्त’ हैं। इसका असर यह है कि गांव-कस्बों में ही नहीं, शहरों में भी मरीज इलाज के लिए परेशान हो
रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में 18 हजार डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में सिर्फ 15500 डॉक्टर ही काम कर रहे हैं। यानी ढाई हजार पद खाली हैं। इन सब के बाद भी सीनियर रेजिडेंट, पोस्ट पीजी और पोस्ट एमबीबीएस डिप्लोमा कर चुके डॉक्टरों को अस्पतालों में भेजने के बजाय स्वास्थ्य भवन और मेडिकल कॉलेजों में काम लिया जा रहा है। नियमानुसार…एपीओ होने के 1 माह में पोस्टिंग जरूरी
तीन-चार माह से एपीओ चल रहे डॉक्टर रोज मुख्यालय आते हैं और साइन करके लौट जाते हैं। जबकि नियमानुसार, राजस्थान सर्विस रूल्स के नियम 25-ए के अनुसार एपीओ होने के बाद एक माह में पोस्टिंग देना अनिवार्य है। इधर, सूत्रों का कहना है कि एपीओ डॉक्टरों की फाइल चिकित्सा मंत्री स्तर पर लंबित है। दूसरी ओर, यदि सभी एपीओ डॉक्टरों को पोस्टिंग दी जाती है, तो सरकार को 50 करोड़ रुपए के एरियर का भुगतान करना पड़ेगा। ऐसे में बिना काम लिए ही सरकारी खजाने पर भार पड़ेगा। असर…एक-एक डॉक्टरों के भरोसे पीएचसी, मरीज परेशान हो रहे प्रदेश में इस समय 63 जिला अस्पताल, 125 उप जिला अस्पताल, 31 सेटेलाइट अस्पताल, 849 सीएचसी, 2816 पीएचसी और 15,291 हेल्थ सब-सेंटर संचालित हैं। इनमें से बड़ी संख्या में संस्थानों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद खाली हैं। कई पीएचसी एक ही डॉक्टर के भरोसे चल रहे हैं। इमरजेंसी, डिलीवरी, ओपीडी और प्रशासनिक जिम्मेदारी सब कुछ एक व्यक्ति पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि डॉक्टरों की यह कमी सीधे तौर पर मातृ मृत्यु दर, नवजात मृत्यु और गंभीर बीमारियों की पहचान में देरी का कारण बन रही है। क्यों एपीओ किए गए
डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही, अभद्रता का आरोप, विभागीय जांच, पीजी या डिप्लोमा और सीनियर रेजिडेंसी पूरा होना के बाद एपीओ किया गया है। अभी यह मुख्यालय में सेवाएं दे रहे हैं। विस सत्र से पहले पोस्टिंग !
इधर, एपीओ डॉक्टरों को उम्मीद है कि विधानसभा सत्र से पहले पोस्टिंग का रास्ता साफ होगा। इससे डॉक्टरों को काम मिलेगा और मरीजों को राहत। सवाल… जब डॉक्टर हैं, तो अस्पतालों में इलाज क्यों नहीं? क्या प्रशासनिक देरी आमजन की सेहत से ज्यादा अहम हो गई है? “एपीओ चल रहे डॉक्टरों की पोस्टिंग की प्रक्रिया जारी है। इसमें सीनियर रेजिडेंट, पोस्ट पीजी और पोस्ट एमबीबीएस डिप्लोमा डॉक्टर शामिल हैं।” -डॉ. रवि शर्मा, निदेशक (जन स्वास्थ्य), चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग


