पंचायत चुनाव:मनरेगा में बदलाव को पंचायत चुनाव में भुनाएगी कांग्रेस, यही रहेगा कैंपेन का टूल

राजस्थान में होने वाले पंचायत चुनाव में मनरेगा कांग्रेस के लिए ऑक्सीजन का काम कर सकती है। पार्टी मनरेगा के नाम बदलने और नए एक्ट बनाए जाने को ही चुनाव कैंपेन का टूल बनाएगी। इसी को ध्यान में रखकर कांग्रेस ने ग्राउंड जीरो पर काम शुरू कर दिया है। नए साल की शुरुआत से ही प्रदेश कांग्रेस ने वॉर रूम स्तर पर इसकी रणनीति बनाना शुरू कर दिया था, जिसे अब अमली जामा पहनाया जा रहा है। पार्टी की ओर से किए गए विरोध और बयानों के बीच भाजपा ने भी हालांकि गांव-गांव, घर-घर तक विकसित भारत- जी राम जी विधेयक, 2025 के प्रावधानों की जानकारी देने का प्लान किया है। हालांकि अपनी बात लोगों के बीच ले जाने में कांग्रेस ने शुरुआत पहले कर दी। चुनाव का मिल गया मुद्दा असल में कांग्रेस मानकर चल रही है कि मनरेगा हटाकर नए कानून लाना पंचायत चुनाव में उनके लिए तुरूप का इक्का साबित हो सकता है। अब तक 14 हजार पंचायतों में से 9 हजार 5 सौ के करीब पंचायतों में घर-घर जनसंपर्क, सम्मेलन व यात्राओं जैसे कार्यक्रम या तो तय कर लिए गए हैं, या कर भी लिए गए हैं। टारगेट तय किया गया है कि 29 जनवरी तक सभी पंचायतों में यह काम पूरा कर लिया जाए। 30 जनवरी के बाद डोटासरा, जूली, गहलोत, पायलट जैसे दिग्गज नेताओं के दौरे भी बन सकते हैं। रणनीति… वॉर रूम रख रहा हर कार्यक्रम की खबर प्रदेश कांग्रेस महासचिव मीडिया सेंटर चेयरमैन स्वर्णिम चतुर्वेदी ने बताया कि सभी तैयारियों, आयोजनों की रिपोर्ट वॉर रूम इकट्ठा कर रहा है। हर खबर, वीडियो-फोटो के साथ पूरी डिटेल का डाटा तैयार किया जा रहा है। कितने कार्यकर्ता काम में लगे, कितने सक्रिय, कितने निष्क्रिय ये डाटा भी जुटा रहे। डोटासरा मॉनिटरिंग कर रहे हैं। प्रदेश कमेटी से पंचायत तक
कांग्रेस ने पंचायत राज चुनाव को देखते हुए नए वर्ष की शुरुआत में ही स्टेट लेवल कमेटी बना दी थी। जिलों में भी को-ऑर्डिनेशन कमेटी बनाई गई। यह को-ऑर्डिनेशन कमेटी कार्यक्रम तय कर मंडल स्तर पर मनरेगा के खत्म किए जाने को लेकर कार्यक्रम कराएगी। कांग्रेस सभी 14 हजार से अधिक पंचायतों में सम्मेलन और यात्राएं निकालेगी। इसमें मनरेगा के पूर्व के प्रावधानों से मिले लाभों को गिनाया जाएगा। प्रत्याशी चयन का जरिया भी हर विधानसभा क्षेत्र में एक पखवाड़ा पहले ऑब्जर्वर लगा दिए गए थे। वे हर पंचायतों की मीटिंग ले रहे हैं। जो सक्रिय हैं और अच्छा काम कर रहे हैं तो वे टिकट के भी दावेदार हो जाएंगे। यानी एक के साथ दो काम हो रहे हैं। आंदोलन भी कर रहे हैं और प्रत्याशियों की पहचान भी की जा रही है। प्रत्याशियों पर नजर डाली जा रही है। जब चयन किया जाएगा, तो सक्रिय कार्यकर्ताओं को सूची से निकालकर प्रत्याशियों की सूची में डाला जाएगा।

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