मनुष्य को ऋषभ देवजी जैसा आदर्श पिता होना चाहिए: शर्मा

भास्कर न्यूज | बालोद शहर के पांडेपारा में श्रीमद् भागवत महापुराण में कथा वाचिका देवी गीतांजलि शर्मा ने मीरा चरित्र, कपिल-देवहूति चरित्र एवं माता सती चरित्र की भावपूर्ण कथा का रसपान कराया। मीरा चरित्र की कथा सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। करुण रस से परिपूर्ण प्रसंगों ने श्रोताओं की आंखें नम कर दीं। कथा के दौरान वातावरण भक्तिमय हो गया। गीतांजलि शर्मा ने ध्रुव चरित्र, जड़ भरत कथा, अजामिल व्याख्यान, प्रह्लाद चरित्र एवं नरसिंह अवतार का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि उनके शील गुण से प्रसन्न होकर भगवान ने प्रभुजी को उनकी रूचि के अनुसार दस हजार कानों की शक्ति प्राप्त करने का वरदान दिया, जिससे वे अर्धनिश प्रभु का गुणगान सुनते रहें। इसके बाद ऋषभ देव के चरित्र वर्णन करते हुए कहा कि मनुष्य को ऋषभ देवजी जैसा आदर्श पिता होना चाहिए। जिन्होंने अपने पुत्रों को समझाया कि इस मानव शरीर को पाकर दिव्य तप करना चाहिए, जिससे अंत:करण की शुद्धि हो तभी उसे अनंत सुख की प्राप्ति हो सकती है। भगवान को अर्पित भाव से किया गया कर्म ही दिव्य तप है। कथा में भगवान की भक्ति, धैर्य, वैराग्य एवं सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश दिया गया। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण हेतु उपस्थित होकर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *