स्वास्थ्य विभाग ने एक सैंपल सर्वे के तहत जिले 100867 लोगों की खून की जांच कराई। इनमें 48,180 लोग एनीमिया से ग्रसित पाए गए। यानी लगभग हर दूसरा व्यक्ति खून की कमी से जूझ रहा है। पहले चरण में स्कूली छात्राओं में खून की कमी दूर करने के लिए दैनिक भास्कर व चिकित्सा विभाग ने अभियान शुरू किया है। 6 माह से 59 माह तक के 10545 बच्चों की जांच हुई, जिनमें से 2354 बच्चों में खून की कमी मिली। इनमें 52 बच्चे गंभीर एनीमिया से पीड़ित हैं। वहीं 5 से 9 साल के बच्चों में 8570 जांचों में से 3341 बच्चे एनीमिक मिले, इनमें भी 1779 बच्चे गंभीर एनीमिक हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार 10 से 19 वर्ष के बच्चों और किशोरों की चिंताजनक स्थिति है। इस वर्ग में कुल 36194 जांचों में से 17359 (48%) एनीमिया ग्रसित है। 10032 किशोर का 11 से 11.9 के बीच हीमोग्लोबिन है। 7,263 मध्यम और 64 गंभीर एनीमिया के केस हैं। इनमें से ज्यादातर बालिकाएं हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस उम्र में खून की कमी पढ़ाई, शारीरिक विकास और भविष्य की सेहत पर सीधा असर डालती है। गर्भवती महिलाओं में हर तीसरी एनीमिक है। कुल 12,936 जांचों में से 5,398 (42%) महिलाएं एनीमिक पाई गईं। इनमें 3,863 माइल्ड, 1,523 मध्यम और 12 गंभीर एनीमिया के मामले सामने आए। एफसीएम इंजेक्शन लगेंगे, आयरन टेबलेट बंटेंगी राज्य सरकार ने एफसीएम, Ferric Carboxy maltose इंजेक्शन लगाने के लिए नवंबर और दिसंबर में पिंक पखवाड़ा चलाया था। राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार यह इंजेक्शन सुरक्षित और प्रभावी है। डॉ. अनुराग शर्मा ने बताया कि एफसीएम इंजेक्शन इतना प्रभावी है जिन गर्भवती महिलाओं का हीमोग्लोबिन लेवल 10 से कम होता है, उन्हें तीन महीने की गर्भावस्था के बाद एफसीएम इंजेक्शन लगाया जाता है। एक महीने बाद उन महिलाओं का 3 से 5 ग्राम हीमोग्लोबिन बढ़ जाता है, जिससे महिलाओं को सुरक्षित मातृत्व प्राप्त होता है। एक गर्भवती महिला को तीन डोज दी जाती है। पिंक पखवाड़े के दौरान बापू नगर स्वास्थ्य केंद्र पर एक महीने में 92 महिलाओं को एफसीएम इंजेक्शन लगाए गए। पिछले दिनों जवाहर नगर, बापू नगर सहित अन्य स्कूलों में छात्राओं का ब्लड टेस्ट करवाया गया था, तो वहां कुछ बच्चियां एनीमिक मिलीं यानि उनका हीमोग्लोबिन स्तर 10 से कम था। जो गंभीर बच्चियां थीं, उन्हें एफसीएम इंजेक्शन लगाया गया। अब इस अभियान के तहत ज्यादा एनेमिक बच्चों को एफसीएम इंजेक्शन लगाए जाएंगे। साथ ही आयरन की टेबलट की संख्या भी बढ़ाई जाएगी।सीएमएचओ डॉ. संजीव शर्मा ने बताया कि इस अभियान के तहत बच्चियों का पूरा रिकॉर्ड यू-विन पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा, जिससे वो बच्चियां जहां भी रहें, उनका रिकॉर्ड उनके आधार और मोबाइल नंबर से ट्रैक होता रहेगा।


