भास्कर न्यूज | भीलवाड़ा इस साल पहले मानसून के दौरान पर्याप्त बारिश से नदी-नालों, बांधों और तालाबों में पानी की पर्याप्त आवक से हर साल गर्मी में सूखने वाले कुओं और ट्यूबवैल का जल स्तर स्तर बढ़ने से गर्मी के दौरान दूसरे प्रदेशों में आइसक्रीम कारोबार के साथ ही अन्य कामधंधे के लिए जाने वाले युवाओं का रुझान खेती करने की तरफ बढ़ा है। इसका असर यह हुआ कि कृषि विभाग द्वारा रबी फसलों की बुआई के लिए लिया 3.64 लाख हैक्टेयर लक्ष्य पूरा हो चुका है। जौ, सरसों और मसूर की लक्ष्य से भी अधिक बुआई की गई। मसूर की पहली बार प्रयोग के तौर पर 2 हजार हैक्टेयर में बुआई करनी थी, जो भी लक्ष्य से अधिक हो चुकी है। मुख्य फसल गेहूं की 175000 हजार हैक्टेयर के मुकाबले 155596 हैक्टेयर में बुआई की गई, जो करीब 89% बुआई की जा चुकी है, जबकि तीन फसलों जौ, सरसों और मसूर की लक्ष्य से अधिक जौ की 156, मसूर की 133 और सरसों की 122 प्रतिशत बुआई हो चुकी है। मसूर की इस बार प्रयोग के तौर पर बुआई का 2 हजार हैक्टेयर लक्ष्य तय किया, जो 133 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। इनके अलावा जीरा 400 हैक्टेयर के मुकाबले 215, सब्जियां, चारा और अन्य फसलों की 9600 हैक्टेयर के मुकाबले 159%क्षेत्र में बुआई की जा चुकी है। पहली बार कृषि विभाग द्वारा रबी की बुआई के तय लक्ष्य 3.64 लाख हैक्टेयर के मुकाबले 3.61 लाख से अधिक हैक्टेयर में फसलों की बुआई की गई, जो लक्ष्य की 99 प्रतिशत से अधिक है, इसका कारण कई ऐसे युवा जो गर्मी में दूसरे प्रदेशों में आइसक्रीम आदि का काराबार करने जाते हैं, वे भी जलस्त्रोतों में पर्याप्त पानी के चलते खेती कर रहे हैं। वर्तमान मौसम के हालात देखते हुुए इस बार रबी की फसलों की बंपर पैदावार होगी। इससे किसानों को फायदा होने के साथ ही आमजन को भी खाद्यान सस्ता मिलेगा। संयुक्त निदेशक कृषि विनोद जैन के अनुसार रबी की प्रमुख फसल गेहूं की बुआई लक्ष्य की 89 प्रतिशत पूरी होने से उत्पादन बढेगा। अब किसानों का काम गेहूं, जौ आदि फसलों को नीलगायों और जंगली सुअरों से बचाने का है, क्योंकि गीले खेत में खड़ी फसल को सुअर आसानी से बर्बाद कर सकते हैं। मांडलगढ़ में खेतों लहलहाती फसलें।


