ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने अंता उपचुनाव में भाजपा की हार के लिए पार्टी के कमजोर मैनेजमेंट को जिम्मेदार माना है। मंत्री नागर ने साफ कहा कि चुनावी रणनीति और स्थानीय स्तर पर जुड़ाव में कहीं न कहीं कमी रही, जिसका असर नतीजों में दिखा। मंत्री नागर ने कहा कि संभव है अंता से भाजपा विधायक रहे जनप्रतिनिधि ने दो साल तक जनता से अपेक्षित जुड़ाव नहीं रखा हो। यही वजह रही कि जनता का विश्वास कमजोर पड़ा और पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने स्वीकार किया कि तीसरे फ्रंट के आने से चुनावी समीकरण बिगड़े और उसका सही आंकलन नहीं हो सका। तीसरे उम्मीदवार ने भाजपा के अधिक वोट काटे, जबकि कांग्रेस को अपेक्षाकृत कम नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि चुनाव केवल बूथ लेवल पर काम करने से नहीं जीते जाते, बल्कि दूर रहकर मैनेजमेंट और समन्वय भी जरूरी होता है। मुख्यमंत्री लगातार चुनाव को लेकर निर्देश दे रहे थे और जो जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं, उनका पूरी तरह से निर्वहन किया गया। शहर में मेंटेनेंस के नाम बिजली कटौती कोटा में बिजली वितरण फ्रेंचाइजी केईडीएल के कामकाज को लेकर मंत्री नागर ने असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को जिस स्तर की सेवाएं मिलनी चाहिए थीं, वे नहीं मिल रहीं। मेंटीनेंस के नाम पर बार-बार बिजली कटौती और ट्रिपिंग आम बात हो गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि बड़े बकायेदारों के कनेक्शन नहीं काटे जाना कितना उचित है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि केईडीएल को सरकार को फिक्स चार्ज देना ही होता है। यदि कंपनी समय पर वसूली नहीं कर पा रही है तो उसकी जिम्मेदारी खुद कंपनी की है। सरकार का कोई दबाव नहीं है। उन्होंने बताया कि एक उच्च स्तरीय समिति केईडीएल से जुड़ी शिकायतों की जांच कर रही है और रिपोर्ट आने के बाद सुधारात्मक कदम और कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही मंत्री नागर ने कोटा में पर्यटन, विकास कार्य, कोचिंग इंडस्ट्री और नई संभावनाओं पर भी गंभीरता से काम करने की बात कही।


