कोंडागांव में 24 जनवरी को पीएम श्री केन्द्रीय विद्यालय में 188 बटालियन केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) द्वारा “वंदे मातरम् महोत्सव” का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम गृह मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशानुसार 19 जनवरी से 26 जनवरी 2026 तक मनाए जा रहे गणतंत्र दिवस समारोह का हिस्सा था। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं में देशभक्ति, त्याग, एकता और राष्ट्रप्रेम की भावना को जागृत करना था। महोत्सव के दौरान कमांडेंट भवेश चौधरी के मार्गदर्शन में “वंदे मातरम्” राष्ट्रीय गीत का समूह गान किया गया। इसमें विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं, छात्र-छात्राओं के साथ-साथ 188 बटालियन के अधिकारियों, अधीनस्थ अधिकारियों और जवानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। “वंदे मातरम्” गीत का ऐतिहासिक महत्व बताया गया समूह गान से पहले, सहायक कमांडेंट ओ.पी. विष्णोई ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया और “वंदे मातरम्” गीत के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस गीत की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने वर्ष 1876 में की थी और इसे वर्ष 1882 में उनके प्रसिद्ध उपन्यास आनंदमठ में शामिल किया गया था। यह गीत पहली बार 28 दिसंबर 1896 को कांग्रेस के 12वें कोलकाता अधिवेशन में सार्वजनिक रूप से गाया गया था। विष्णोई ने जोर दिया कि “वंदे मातरम्” केवल एक राष्ट्रीय गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है। उन्होंने कहा कि इस गीत ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देश के सेनानियों में अद्भुत ऊर्जा, साहस और बलिदान की भावना का संचार किया, जिससे जन-जन में देशभक्ति की ज्योति प्रज्वलित हुई। कोंडागांव में बसंत उत्सव, पराक्रम दिवस मनाया गया भारत स्काउट एवं गाइड जिला संघ कोंडागांव के जिला संरक्षक नूपुर राशि पन्ना और जिला आयुक्त भारती प्रधान के निर्देशानुसार तथा जिला संगठन आयुक्त भीषभ देव साहू के मार्गदर्शन में संबद्ध शालाओं में बसंत उत्सव एवं पराक्रम दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसी कड़ी में शासकीय प्राथमिक शाला मुरारीपारा बड़ेबेंदरी में कब-बुलबुल टीम ने यह कार्यक्रम मनाया। एडवांस कब मास्टर पवन कुमार साहू, संतोषी पटेल और इशिता भंडारी के नेतृत्व में कब-बुलबुल टीम ने विद्या की देवी सरस्वती माता की पूजा-अर्चना कर बसंत उत्सव कार्यक्रम मनाया। साथ ही, नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर पराक्रम दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष मानकू राम कश्यप, उच्च प्राथमिक शाला मुरारीपारा बड़ेबेंदरी के प्रधानाध्यापक बी.आर. तुरकर, शिक्षिका संतोषी पटेल, इशिता भंडारी, परमानंद पटेल, उमा बिहारी नागेश और कब-बुलबुल टीम के छात्र-छात्राओं की उपस्थिति में हुआ। अतिथियों ने सरस्वती माता और महान क्रांतिकारी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर पुष्प अर्पित किए। इस अवसर पर उपस्थित सभी अतिथियों और कब-बुलबुल टीम के छात्र-छात्राओं ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। एडवांस कब मास्टर एवं प्रधान अध्यापक पवन कुमार साहू ने सुभाष चंद्र बोस के जीवन पर प्रकाश डाला। साहू ने बताया कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को ओडिशा के कटक शहर में एक हिंदू बंगाली परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम जानकी नाथ बोस और माता का नाम प्रभावती था। जानकीनाथ बोस कटक शहर के एक प्रसिद्ध सरकारी वकील थे। उन्होंने यह भी बताया कि अदम्य साहस, त्याग और राष्ट्रनिष्ठा के प्रतीक नेताजी सुभाष चंद्र बोस के सम्मान में प्रतिवर्ष 23 जनवरी को पराक्रम दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिवस उनके निर्भीक नेतृत्व, अनुशासन और स्वतंत्रता संग्राम में अतुलनीय योगदान को स्मरण कराता है। नेताजी ने देशवासियों में आत्मबल और स्वाभिमान का संचार किया था।


