भास्कर न्यूज | लुधियाना सतलुज दरिया स्थित शनिगांव में शनिवार को शून्य प्रभु की अध्यक्षता में शनिदेव जी की पूजा अर्चना की गई। इस दौरान भक्तों की ओर से शनिदेव जी का तेलाभिषेक किया गया और शाम के समय आयोजित हवन यज्ञ में आहुतियां डाली। प्रवचन करते हुए शून्य प्रभु ने बताया कि ईश्वर की प्राप्ति और जीवन में सफलता के लिए कई चीजें नहीं बल्कि एक चीज है, करते चलें और जो करें वह पूरी ईमानदारी से करें। कोई भी इंसान किसी दूसरे इंसान से श्रेष्ठ नहीं है। सभी बराबर है क्योंकि ईश्वर ने किसी से कोई भेदभाव नहीं किया है। शून्य प्रभु ने बताया कि कैसे मन पर नियंत्रण कर आगे बढ़ने से सफलता प्राप्त कर सकते है। व्यक्ति को एक बुद्धि एक चित्त होना चाहिए अनेक बुद्धि नहीं। एक प्रसिद्ध कहानी है। एक तलाब में बहुत सारी मछलियां थी। मछलियों को पता चलेगा कि अगले दिन सुबह मछुआरे उन्हें पकड़ लेंगे। मछलियों में कई बड़ी ज्ञानी थी। एक का नाम शतबुद्धि था। उसने अपनी करीबी मछली से कहा मछुआरों को आने दो मेरे पास तैरने और उनसे खुद को बचाने के सौ तरीके है। एक और मछली थी, जिसका नाम था सहसबुद्धि यानि हजार दिमाग वाली। उसने कहा मेरे पास तैरने और खुद को बचाने के हजारों तरीके है। एक और मछली थी जिसका नाम था एक बुद्धि। उसने अपनी मित्र से कहा देखों मेरा एक ही मन है और वह मन मुझसे कह रहा है कि मछुआरे अपना जाल फेंकेंगे तो मैं नहीं बचूंगी। इसलिए रात के समय ही हम दूसरे तलाब में चलते है। वे चले भी गए। अगली सुबह मछुआरे आए अपना जाल फेंका और तलाब की सारी मछलियां पकड़ ली। एकबुद्धि ने अपनी मित्र से कहा वह देखों बाकि सभी मछलियां जाल में फंस गई। सबको एक मन से काम करना चाहिए। जो दूसरों को मूर्ख समझता है दूसरों से द्वेष करता है वह मानसिक रोग से ग्रस्त है। जो दूसरों को पशु से भी छोटा समझता है वह भी कभी उसकी कृपा प्राप्त नहीं कर सकता। समझ लो उस व्यक्ति ने अब तक स्वयं को मनुष्य सिद्ध नहीं किया है।


