औद्योगिक क्षेत्रों पर बैक पीरियड में कंसेंट टू ऑपरेट की पेनल्टी माफ करने के लिए पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड का आदेश उसी पर भारी पड़ गया है। एनजीटी की जांच में इस आदेश को गलत मानते हुए संशोधित करने के आदेश दिए हैं। जल, वायु और पर्यावरण एक्ट के तहत औद्योगिक इकाई, औद्योगिक पार्क, हॉस्पिटल, होटल्स, मॉल, सोसायटी आदि को लगाने के लिए कंसेंट टू एस्टेब्लिशमेंट तथा प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद कंसेंट टू ऑपरेट लेना अनिवार्य है। लेकिन कुछ बड़े औद्योगिक घरानों और अर्द्ध सरकारी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड जयपुर ने एक कार्यालय आदेश 2 जनवरी 2024 को जारी किया। उसके अनुसार बैक पीरियड की किसी भी औद्योगिक इकाई द्वारा यदि कंसेंट टू ऑपरेट या रिनीवल नहीं ली और फ्रेश आवेदन किया तो उसे बैक पीरियड की पेनल्टी माफ की जाएगी। इस आदेश को बीकानेर के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने एनजीटी में चुनौती दे दी। एनजीटी में आवेदन पेश कर कहा कि बैक पीरियड की पेनल्टी माफ करना सुप्रीम काेर्ट के निर्देशों की अवेहलना है। इस पर एनजीटी भोपाल ने आवेदन स्वीकार करते हुए पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड को नोटिस जारी किया। दरअसल बोर्ड ने विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र जयपुर पर 8 जनवरी 24 को 6 करोड़ 54 लाख रुपए, जैसलमेर के एक एनर्जी ग्रुप पर तीन करोड़ 67 लाख और रीको बीकानेर पर करणी औद्योगिक क्षेत्र के संबंध में 4 करोड़ 82 लाख की पेनल्टी लगाई थी। इस सर्कुलर के तहत कुल 15 करोड़ तीन लाख रुपए की शास्ति माफ करने की तैयारी थी। एनजीटी ने अपने आदेश में कहा है कि पर्यावरणीय क्षति के लिए जिम्मेदार लोगों को इसके प्रबंधन की लागत वहन करनी चाहिए। आदेश में स्टरलाइट इंडस्ट्रीज केस और एलजी पॉलिमर गैस लीक केस की मिसाल भी दी गई है। एनजीटी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिए हैं कि वह राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल की ओर से जारी आदेश और अधिसूचनाओं की समीक्षा करें। साथ ही आदेश को संशोधित करे। जांच कमेटी की रिपोर्ट; पेनल्टी माफ नहीं होनी चाहिए इस प्रकरण में एनजीटी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल और वन मंत्रालय के अधिकारियों की संयुक्त जांच कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी ने 51 पेज की रिपोर्ट 6 नवंबर 24 को एनजीटी के समक्ष पेश की थी। कमेटी ने माना कि बैक पीरियड की पेनल्टी माफ नहीं होनी चाहिए। इस रिपोर्ट के बाद पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड, राजस्थान से जवाब मांगा गया था, लेकिन 15 जनवरी 25 को मामले की सुनवाई के दौरान बोर्ड की ओर से जवाब पेश नहीं किया जा सका। इस पर एनजीटी ने सर्कुलर को संशोधित करने के आदेश जारी करते हुए बोर्ड पर पांच हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। जवाब पेश करने के लिए बोर्ड को 60 दिन का समय दिया है। बोर्ड इस आदेश के विरुद्ध स्टे ना ले सके इसलिए परिवादी ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट जयपुर में कैविएट दायर की है। “बैक पीरियड में कंसेंट टू ऑपरेट का मामला मुख्यालय स्तर का है। यदि कोई आवेदन आता है तो मुख्यालय से मार्गदर्शन मांगा जाएगा। फैक्ट्रियों को कंसेंट टू ऑपरेट जारी करने का काम किया जा रहा है।”
-राजकुमार मीणा, क्षेत्रीय अधिकारी, पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड कंसेंट टू ऑपरेट बिना ही विकसित हो रहे औद्योगिक क्षेत्र : प्रदेश में रीको के कुल 422 औद्योगिक क्षेत्र हैं। इनमें से विकसित 408 हैं। नए एरिया स्थापित करने के लिए तो कंसेंट टू एस्टेब्लिश ले रहे हैं, जबकि विकसित एरिया की नहीं ली जा रही है। पेनल्टी कंसेंट टू ऑपरेट पर लगती है। हाल ही में अनूपगढ़ में 9 ईंट भट्टों पर 15 से 25 लाख तक पेनल्टी वसूली गई है। बीकानेर में रीको के 16 औद्योगिक क्षेत्रों में कंसेंट टू ऑपरेट एक के भी पास नहीं है। पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने केवल करणी औद्याेगिग एरिया पर ही पेनल्टी लगाई है। स्थिति ये है कि खारा औद्योगिक क्षेत्र में फैक्ट्रियों को आवेदन के चार-चार साल बाद कंसेंट टू ऑपरेट जारी किए गए हैं, जबकि नियम चार महीने का है। खारा औद्योगिक क्षेत्र में वायु प्रदूषण का मामला गर्माया खारा औद्योगिक क्षेत्र में वायु प्रदूषण का मामला फिर से गरमा गया है। मामला एनजीटी में जाने के बाद फैक्ट्रियों को कंसेंट टू ऑपरेट लेने के लिए नोटिस जारी किए जा रहे हैं। इसमें भी गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है। पराली जलाने वाली एक-दो फैक्ट्रियों गैस भट्टी के आधार पर आवेदन किया है। उधर पीओपी फैक्ट्रियों से हो रहे प्रदूषण का मामला भी अभी ठंडा नहीं हुआ है। धुएं को लेकर खारा के ग्रामीणों में असंतोष बना हुआ है, जबकि वहां 95 प्रतिशत तक पीओपी इकाइयों द्वारा वाटर स्क्रबर और डस्ट कलेक्टर लगाने का दावा किया जा रहा है। पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड को चार फरवरी को एनजीटी में तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करनी है।


