शुभेंदु शुक्ला अमृतसर निगम ने केंद्र की राष्ट्रीय विरासत शहर विकास और वृद्धि (हृदय) योजना के तहत 2017-18 में 40 खूह में कम्युनिटी हॉल व क्लब की बिल्डिंग तैयार कराई थी। 5 करोड़ से तैयार बिल्डिंग सिविल विभाग की अनदेखी के कारण 8 साल में ही खंडहर बन चुकी है। निगम सूत्रों के मुताबिक जब प्रोजेक्ट शुरू हुआ था तो सेंट्रल की टीमें विजिट करने आती थीं। अफसरों से ब्यौरा लिया जाता रहा लेकिन अब यहां कोई झांकने तक नहीं आता है। यहां सिर्फ बिल्डिंग ही नहीं लोगों के टहलने को पार्क, जिम, बच्चों के लिए झूले, बैठने के लिए कुर्सियां व अन्य सुविधाएं डवेलप कराई गई थीं। सुरक्षा के लिए सिक्योरिटी गार्ड भी रखवाए गए थे लेकिन बाद में भगवान भरोसे छोड़ दिया गया। सिक्योरिटी गार्ड के हटते ही चोरों ने दरवाजे-खिड़कियां, एसी, बिजली बोर्ड, तारें, टॉयलेट पॉड, नलों की टोंटी व अन्य सामान चोरी कर लिया। लोगों का कहना है कि यहां अब नशेड़ियों का डेरा रहता है। आसपास के लोगों ने बताया कि काफी अच्छी बिल्डिंग बनवाई गई थी लेकिन सिक्योरिटी गार्ड हटा लिए गए जिस कारण अब यह खंडहर बन चुकी है। नशेड़ियों व चोरों के लिए सबसे बेहतर अड्डा बना हुआ है। निगम का कोई अफसर यहां झांकने तक नहीं आता है। पेड़ों के सूखे पत्ते गिरे पड़े है और झाड़ियां भी उग चुकी हैं लेकिन सफाई कराना जरूरी नहीं समझा जा रहा। कम्युनिटी सेंटर में 5 कमरों के अलावा चारों तरफ ओपन बरामदानुमा बनाया गया है। वहीं क्लब में 2 छोटे कमरे और एक बड़ा हॉल और 2 साइड बड़े बरामदे बने हुए हैं। पूरी लग्जरी सुविधाएं बनाई गई थीं लेकिन अब यहां कबूतरों का डेरा बन चुका है। वहीं आवारा पशु भी पहुंच जाते हैं। कभी बेहतर लाइटिंग नजर आती थी मगर आज रात तो दूर दिन में ही सन्नाटा पसरा रहता है। वहीं निगम कमिश्नर और ज्वाइंट कमिश्नर को मामले के बारे अवगत कराया गया मगर दोनों अफसरों ने चुप रहना जरूरी समझा। कम्युनिटी सेंटर-क्लब निर्माण के दौरान करीब 5 सिक्योरिटी गार्ड रखे गए थे लेकिन प्रोजेक्ट खत्म होने के बाद बिल्डिंग को उसी हाल में छोड़ दिया गया। यदि इसे ठेके पर दिया जाता तो भी प्रोजेक्ट चलता रहता और सरकार की आमदनी होती रहती। बता दें कि निगम के सिविल विभाग में एसई-एक्सईएन-एसडीओ व अन्य मुलाजिमों की फौज होती है। प्रोजेक्ट को संभालने की बजाय इसे ऐसे ही छोड़ दिया गया। लोगों की सहूलियत के लिए करोड़ों से कम्युनिटी सेंटर व क्लब बनवाया गया। जिम व बच्चों के लिए झूले भी लगाए गए। देखरेख के अभाव में जिस तरह बिल्डिंग खंडहर हो चुकी है, यह जनता के पैसों की बर्बादी है। लोगों से शिकायत मिली है कि कम्युनिटी सेंटर की सुध लेने कोई निगम अफसर नहीं पहुंचा। जल्द मौके का दौरा करेंगी। -प्रियंका शर्मा, सीनियर डिप्टी मेयर सेंटर की टूटी खिड़कियां-दरवाजे।


