धौलपुर की नगरपरिषद: भीतर डिजिटल, बाहर ढकेल कल्चर: ठेलों पर दुकान

भास्कर न्यूज| धौलपुर हाईटेक करोड़ों रुपए की बिल्डिंग में नगरपरिषद शिफ्ट हुई थी, जिसे पूरी तरह डिजिटल होने का दावा किया जाता है। लेकिन जैसे ही आप इस भव्य इमारत के मुख्य द्वार पर आप नजर डालेंगे तो परिषद की दावों की हवा निकल जाती है। गेट के दोनों ओर अव्यवस्थित तरीके से खड़े फोटो कॉपी और अन्य ऑनलाइन कामकाज करने वाले ठेले व ढकेल वाले नगर परिषद की तंगहाल व्यवस्था की कहानी खुद बयां कर रहे हैं। जब नई परिषद बिल्डिंग में अंदर काम डिजिटल हो रहे हैं,लेकिन बाहर ढकेल कल्चर की तस्वीर अव्यवस्था को उजागर करती है। नगरपरिषद के बाहर ठेले पर फोटोकॉपी व अन्य कामकाज के कागज तैयार हो रहे हैं। जबकि नगरपरिषद ने लोगों को ऑनलाइन नगरपरिषद संबंधी काम निपटाने के लिए नगर-मित्रों की नियुक्ति प्राइवेट स्तर पर की है,लेकिन परिषद परिसर में फोटोकॉपी संचालकों को व्यवस्थित नहीं किया गया है, इससे नप की तंगहाली तस्वीर बोल उठी है। ये बोले एक्सईएन नगरपरिषद के एक्सईएन गुमानसिंह सैनी का कहना है कि नगरपरिषद के बाहर दो ठेले वाले नप में आने वाले लोगों के लिए फोटोकॉपी करते हैं। वैसे तो ये अवैध हैं। कल से नहीं लगेंगी। लेकिन जब भास्कर ने रोजगार को नहीं छिनने की बात की तो उन्होंने बताया कि इनको पक्की जगह अंदर दे सकते हैं, लेकिन इसके लिए पहले टेंडर होंगे। इसलिए जल्द टेंडर प्रक्रिया कराकर इनको अंदर कियोस्क नुमा जगह देने की व्यवस्था कराते हैं। हां, ये सही है कि नगरपरिषद के बाहर ठेले लगने से नगरपरिषद की छवि पर फर्क पड़ता है। जिस तरह से डीएलबी ने हाल ही दो नगर मित्र की नियुक्ति की है, उसी तर्ज पर इनको भी जगह दिलवाने के प्रयास कराते हैं। नगरपरिषद में हैरानी की बात यह है कि नगर परिषद ने जनता की सुविधा के लिए नगर-मित्र हायर किए हैं। इन नगर-मित्रों का काम लोगों को डिजिटल सेवाओं से जोड़ना और उनकी फाइलें तैयार करवाना है। लेकिन सवाल यह उठता है कि जब सरकार और प्रशासन ने डिजिटल व्यवस्था के लिए इतना तामझाम किया है, तो इन जरूरी सेवाओं में फोटोकॉपी और ऑनलाइन फॉर्म को एक पक्की छत क्यों नहीं दी जा सकी। जब नगर-मित्र अंदर बैठ सकते हैं, तो इन आवश्यक कार्यों को करने वाले दुकानदारों को परिषद परिसर के भीतर एक निश्चित और पक्की जगह क्यों नहीं आवंटित की गई है। जबकि भास्कर से बात की तो नप सीएसआई प्रकाश श्रीवास्तव ने इनको अवैध बताया है। आम जनता की बुनियादी जरूरतों को भूल गईनगरपरिषद:- अब ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि नगर परिषद ने आधुनिक सुख-सुविधाओं से लैस नई बिल्डिंग में शिफ्ट होकर खुद को अपग्रेड तो कर लिया, लेकिन आम जनता की बुनियादी जरूरतों को भूल गई। परिषद परिसर के बाहर आज भी पुराने ढर्रे पर ठेलों से काम चल रहा है। धूप और धूल के बीच इन ठेलों पर लोग फोटोकॉपी कराने और फॉर्म भरवाने के लिए मजबूर हैं। करोड़ों की लागत से बनी इस नई बिल्डिंग के गेट पर पसरी यह अव्यवस्था न केवल शहर की छवि खराब कर रही है।

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