बेटा या बेटी घर से भाग जाए तो सबसे गहरा आघात माता-पिता को लगता है। ऐसे समय में सहारा देने के बजाय समाज द्वारा सजा सुनाना न केवल अमानवीय, बल्कि संवैधानिक अधिकारों के भी खिलाफ है। पिपलौदा ब्लॉक के गांव पंचेवा में ग्रामीणों ने मंदिर परिसर में हुई सामूहिक बैठक में ऐसा ही तुगलकी फरमान जारी किया। बैठक में ऐलान किया गया कि यदि किसी परिवार का बेटा या बेटी घर से भागकर 1 लव मैरिज करता है, तो उसके माता-पिता और पूरे परिवार का सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा। शनिवार रात हुई बैठक का वीडियो रविवार को वायरल हुआ। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया। एसडीएम सुनील जायसवाल ने जनपद सीईओ ब्रह्मस्वरूप हंस और पटवारी को गांव भेजा। अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाइश दी कि सामाजिक बहिष्कार जैसे फैसले कानून के खिलाफ हैं। एसडीओपी संदीप मालवीय ने कहा, शिकायत मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। क्या कहता है कानून : 18 साल की युवती और 21 साल का युवक अपनी मर्जी से शादी कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार सामाजिक बहिष्कार और पंचायत के ऐसे फरमान अवैध हैं। इसके साथ ही शीर्ष कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि प्रेम विवाह करने वाले वयस्कों की सुरक्षा संबंधित राज्य की जिम्मेदारी है। वीडियो वायरल होने के बाद भास्कर संवाददाता गांव पहुंचा। पीड़ित पिता ने बताया, नाबालिग बेटी को युवक भगा ले गया। रिपोर्ट के बावजूद मदद नहीं मिली। ग्रामीणों ने उल्टा परिवार को दोषी ठहरा दिया।


