भोपाल पुलिस पहली बार शहर की उन संकरी गलियों का डेटा तैयार कर रही है, जहां एंबुलेंस, पुलिस वाहन और फायर ब्रिगेड नहीं पहुंच पातीं। इन इलाकों में इमरजेंसी सेवाएं बाधित होने की बड़ी वजह अवैध अतिक्रमण और अनियंत्रित निर्माण को माना जा रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए पुलिस अब इन गलियों की जियो टैगिंग भी करेगी, ताकि भविष्य में कार्रवाई और प्लानिंग आसान हो सके। करीब महीनेभर पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैठक लेकर शहरों की ऐसी संकरी गलियों, वहां हुए अतिक्रमण और अवैध गतिविधियों का डेटा तैयार करने के निर्देश दिए थे। इसी के तहत अब भोपाल पुलिस के साथ-साथ नगर निगम और जिला प्रशासन की टीमें भी अपने-अपने स्तर पर जानकारी जुटा रही हैं। हफ्तेभर के भीतर तीनों एजेंसियां अपनी रिपोर्ट संभागायुक्त कार्यालय में जमा करेंगी। इसके बाद संभागायुक्त के साथ पुलिस, नगर निगम और जिला प्रशासन की संयुक्त बैठक होगी। भोपाल संभागायुक्त को इस पूरे अभियान का नोडल अधिकारी बनाया गया है। उनके साथ होने वाली बैठक में तय होगा कि आगे कहां अतिक्रमण हटाना है, कहां चौड़ीकरण करना है और किन इलाकों में सख्त निगरानी जरूरी है। इन तीन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भी बोले पुलिस कमिश्नर 3 दिन में करें जियो टैगिंग… इसके लिए पुलिस कमिश्नर हरिनारायणचारी मिश्र ने भी बैठक में तीन दिन में जियो टैगिंग का काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं। बैठक में सभी राजपत्रित अधिकारी और थाना प्रभारी शामिल थे। सीपी ने कहा कि जिन थाना क्षेत्रों में घनी बस्ती और संकरी गलियां हैं, वहां अफसर खुद अतिक्रमण चिन्हित करें। इन इलाकों में फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस और पुलिस की गाड़ियां बिना रुकावट पहुंच सकें, इसके लिए जरूरी कार्रवाई की जाए।


