गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। इस वर्ष राजस्थान की तीन हस्तियों को पद्मश्री सम्मान से नवाजा जाएगा। इनमें प्रसिद्ध भपंग वादक गफरूद्दीन मेवाती जोगी, अलगोजा वादक तगा राम भील और नेत्रहीनों की ज्योति बने संत स्वामी ब्रह्मदेव महाराज शामिल हैं। ब्रह्मदेव महाराज ने ब्रेल लिपि का पहला ATM श्रीगंगानगर में लगवाया। श्रीगंगानगर स्थित श्री जगदंबा अंध विद्यालय एवं मूक-बधिर विकलांग संस्थान के संस्थापक हैं। हरिद्वार से श्रीगंगानगर तक सेवा की यात्रा स्वामी ब्रह्मदेव महाराज बताते हैं कि वर्ष 1978 में हरिद्वार में श्रीगंगानगर के एल ब्लॉक निवासी दो व्यक्तियों से उनकी मुलाकात हुई। उन्होंने एल ब्लॉक में निर्माणाधीन हनुमान मंदिर में सत्संग के लिए आमंत्रित किया। उसी वर्ष वे दो दिन के लिए श्रीगंगानगर आए और 1979 में नौ दिनों के प्रवास पर यहां पहुंचे। इसके बाद एल ब्लॉक हनुमान मंदिर कमेटी के आग्रह पर वे करीब डेढ़ वर्ष तक मंदिर परिसर में रुके। मंदिर निर्माण और बालाजी की प्राण प्रतिष्ठा के बाद वे वापस हरिद्वार लौट गए, लेकिन 1979 के अंत में पुनः श्रीगंगानगर आए और एक धार्मिक कार्यक्रम में भाग लिया। यहीं से उनके स्थायी रूप से श्रीगंगानगर में रहने और सेवा कार्य शुरू करने का निर्णय हुआ, जिसने आगे चलकर अंध विद्यालय की स्थापना का रूप लिया। श्री जगदंबा अंध विद्यालय से बदली हजारों जिंदगियां स्वामी ब्रह्मदेव महाराज ने 13 दिसंबर 1980 को अपने पूज्य गुरुदेव संत बाबा करनैल दास जी महाराज (जलाल वाले) के कर-कमलों से श्री जगदंबा अंध विद्यालय की नींव रखी। शुरुआत में यह संस्थान केवल दृष्टिबाधित बच्चों के लिए था, लेकिन बाद में इसमें मूक-बधिर बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था भी की गई। आज संस्थान में करीब 500 दृष्टिबाधित और मूक-बधिर बच्चे निःशुल्क शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। छात्रावास, विशेष शिक्षा, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता के प्रशिक्षण से इन बच्चों का जीवन नई दिशा पा रहा है। देश का पहला ब्रेल लिपि एटीएम यहीं लगा वर्ष 2007 में श्री जगदंबा अंध विद्यालय में हिंदुस्तान का पहला ब्रेल लिपि युक्त एटीएम स्थापित किया गया, जो दृष्टिबाधितों के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी गई। बाद में इस संस्थान के विस्तार के लिए चक 6 ई छोटी निवासी सुरजा राम कुलचानिया ने 18 बीघा भूमि दान दी। इसी से सेवा का यह कारवां और आगे बढ़ा। आज श्रीगंगानगर की तर्ज पर बीकानेर और हनुमानगढ़ में भी अंध विद्यालय संचालित हो रहे हैं। नेत्र चिकित्सालय से लाखों को मिला नया उजाला स्वामी ब्रह्मदेव महाराज द्वारा स्थापित श्री जगदंबा धर्मार्थ नेत्र चिकित्सालय वर्षों से लाखों नेत्र रोगियों के लिए वरदान साबित हो रहा है। यहां मोतियाबिंद, ग्लूकोमा सहित विभिन्न नेत्र रोगों की सर्जरी की जाती है। अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 50 आंखों के ऑपरेशन होते हैं। वर्ष 1993 से लगातार नि:शुल्क नेत्र जांच शिविर और लेंस प्रत्यारोपण कैंप आयोजित किए जा रहे हैं। दूरदराज के गांवों से मरीजों को लाकर मुफ्त ऑपरेशन, दवाइयां, चश्मा और घर तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाती है। रहने और भोजन की भी पूरी व्यवस्था रहती है। 10 लाख से अधिक दिव्यांगों को मिली नई जिंदगी श्री जगदंबा एजुकेशन एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट में विशेष शिक्षकों का प्रशिक्षण दिया जाता है, वहीं कृत्रिम अंग केंद्र में दिव्यांगों को कृत्रिम अंग उपलब्ध कराए जाते हैं। इन सभी सेवाओं के माध्यम से अब तक करीब 10 लाख दिव्यांगों को नई जिंदगी और नई उम्मीद मिल चुकी है। पहले भी मिल चुके हैं राष्ट्रीय सम्मान स्वामी ब्रह्मदेव महाराज का जन्म 4 अप्रैल 1944 को पंजाब के मुक्तसर साहिब में हुआ था। वे पिछले 47 वर्षों से अधिक समय से दिव्यांगों, विशेषकर दृष्टिबाधित और मूक-बधिर बच्चों की सेवा में समर्पित हैं। 3 दिसंबर 1996 को अंतरराष्ट्रीय विकलांग दिवस पर तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा ने संस्थान को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया था। अब पद्मश्री सम्मान (2026) की घोषणा के साथ स्वामी ब्रह्मदेव महाराज श्रीगंगानगर जिले के तीसरे पद्मश्री प्राप्तकर्ता बन गए हैं। इससे पहले औवतार सिंह चिम्मा और श्याम सुंदर माहेश्वरी को यह सम्मान मिल चुका है। पद्मश्री घोषणा के बाद बधाइयों का तांता एक आध्यात्मिक गुरु, कर्मयोगी और मानवता के प्रतीक स्वामी ब्रह्मदेव महाराज के प्रवचनों से सभी धर्मों में समन्वय, मानवीय मूल्यों और सेवा भावना को मजबूती मिली है। पद्मश्री सम्मान की घोषणा के बाद श्रीगंगानगर सहित प्रदेशभर से लोग उन्हें बधाई देने पहुंच रहे हैं। शहर में खुशी और गर्व का माहौल बना हुआ है।


