माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी पर बसंत पंचमी का पर्व रविवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा हैं। इसके तहत मंदिरों में विशेष आयोजन हो रहे है। ठाकुरजी को पीले वस्त्र धारण करवाए गए। बसंत पंचमी पर्व से मंदिरों में ठाकुरजी को गुलाल-अबीर खेलाना और बसंत व होली के गीत शुरू हो गए। शहर के ऐतिहासिक जगदीश मंदिर के गजेंद्र पुजारी ने बताया कि अलसुबह 5:30 बजे भगवान जगदीश की मंगला आरती हुई। इसके बाद ठाकुरजी का पंचामृत अभिषेक किया गया। फिर पीले वस्त्र धारण कराए गए। सुबह 10:30 बजे शृंगार आरती और दोपहर 12:30 बजे राजभोग धराया गया। इसके बाद भगवान से गुलाल-अबीर से खेला गया। पुजारी ने बताया कि रंग पंचमी तक इसी तरह भगवान की सेवा होगी और होली के गीत गाए जाएंगे। बसंत के फूल, रोज फाग के गीत गाएंगे
श्रीनाथजी मंदिर में भी रविवार को बसंत पंचमी का पर्व मनाया गया। शीतकाल की विदाई और बसंत आगमन का यह पर्व पुष्टिमार्ग में विशेष होता है। ठाकुरजी को बसंत का विशेष शृंगार धराया जाता है। श्रीनाथ मंदिर के दिलखुश दवे ने बताया कि पंचमी से डोल उत्सव तक ठाकुरजी को इन 40 दिनों में अबीर गुलाल धराई जाती है। बसंत पंचमी से ठाकुरजी को गुलाल खेलाना शुरू होगा, जो होली के बाद आने वाली रंग पंचमी तक खेलाई जाएगी।


