रूस में काम करने के लिए गए पंजाब के कई नौजवानों की जिंदगी अब उनके परिवारों के लिए दर्द और इंतजार की कहानी बन गई है। दैनिक भास्कर ऐप ने कई परिवारों से बातचीत की और जाना कि आखिरकार भारत से रूस तक की कहानी क्या रही। अमृतसर निवासी नवदीप कौरने बताया, मेरे पति वर्ष 2024 में अपनी पढ़ाई के आधार पर रूस गए थे। वहां वे पढ़ाई के साथ जो भी काम मिले, वे करते थे। उनका काम लगातार अच्छा चल रहा था, और हम महीनों तक नियमित रूप से संपर्क में रहे। लेकिन एक दिन उन्होंने बताया कि उन्होंने सेना में शामिल होने का फैसला किया है। बढ़िया सेलरी के कारण उन्होंने यह कदम उठाया। उसके बाद कुछ महीनों तक बातचीत होती रही, लेकिन अचानक उनका फोन बंद हो गया। नवदीप कहती हैं कि, आज तक उनका एक भी फोन नहीं आया। मैं अब अपने दो बच्चों की परवरिश अकेले नहीं संभाल पा रही हूं। मेरा एक बच्चा स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहा है और दूसरा पढ़ाई कर रहा है। विदेश गए युवाओं के परिजन वापस लौटने के इंतजार में उन्होंने बताया कि, उनके ससुर और सास बच्चों की देखभाल कर रहे हैं, लेकिन हर दिन रोते हुए। परिवार बस इस आशा में रहता है कि कब उनके बेटे, पति या भाई का फोन आए और उनके दिल को थोड़ी ठंडक मिले। दैनिक भास्कर से बातचीत में सामने आया कि रूस में गए कई नौजवानों के परिवार इसी तरह इंतजार और बेचैनी में हैं। परिवारों का दर्द और अपनों के लिए उम्मीद का सिलसिला यहीं रुकता नहीं, बल्कि हर दिन बढ़ता ही जा रहा है। विदेश में अपने सपनों के पीछे भागते हुए ये नौजवान अपने परिवार से दूर हैं। और उनके परिवार, आंसुओं और यादों के बीच हर दिन सिर्फ इस एक आशा में जी रहे हैं कि उनका फोन कब आए। अमृतसर में रहने वाली मां ने साझा की अपने बेटे साहिल की विदेश यात्रा और हालात सवाल: सबसे पहले हमें अपने बारे में और अपने बेटे के बारे में बताएं। अनिता: मैं अनिता सेखरी, अमृतसर में रहती हू। मेरा बेटा साहिल सेखरी 25 जुलाई 2025 को रूस गया था। वह वर्क परमिट पर गया था, लेकिन वहां उसे कोई काम नहीं मिला। फिर किसी ने उसे अपनी बातों में लेकर फौज में भर्ती करवा दिया। सवाल: क्या आपको अभी तक उसका हाल पता है? अनिता: नहीं, आज उसका फोन आए हुए चार महीने हो चुके हैं, लेकिन मुझे अब तक यह नहीं पता कि मेरा बेटा कहां है। मैं हर दिन उसकी कॉल का इंतजार करती हूं और उसकी आवाज सुनने की आशा करती हू। सवाल: आखिरी बार आपसे बात कब हुई थी और उसने क्या बताया था? अनिता: आखिरी बार जब मेरी बात हुई, उसने कहा कि उसे फ्रंट पर लड़ने के लिए भेजा जा रहा है। उसकी आवाज में मैं उसका दुख साफ देख सकती थी। सवाल: आपके लिए यह स्थिति कैसी है? अनिता: यह बहुत कठिन है। हर माता-पिता की तरह, मैं अपने बेटे की सुरक्षा और भविष्य के लिए लगातार दुआएं कर रही हूं।


