पेंच टाइगर रिजर्व के अरी बफर रेंज में करीब 5-6 महीने की एक मादा बाघ शावक ने दम तोड़ दिया। शावक की मौत का कारण कमजोरी, पुरानी चोट और निमोनिया बताया जा रहा है। वन विभाग ने उसे बचाने और उसकी मां (बाघिन) से वापस मिलाने की काफी कोशिशें कीं, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद नन्ही शावक को बचाया नहीं जा सका। मां से मिलाने की थी पूरी तैयारी वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कुछ दिन पहले अरी बफर रेंज में यह शावक काफी कमजोर हालत में मिली थी। कैमरा ट्रैप की तस्वीरों से पता चला था कि यहां एक बाघिन अपने चार शावकों के साथ घूम रही थी। विभाग को उम्मीद थी कि शावक अपनी मां के पास वापस चली जाएगी, इसलिए उसे उसी क्षेत्र में सुरक्षित छोड़ा गया था। लेकिन अगले दिन वह फिर उसी जगह मिली और उसकी हालत और ज्यादा बिगड़ चुकी थी। रेस्क्यू के बाद भी नहीं हुआ सुधार शावक की गंभीर स्थिति को देखते हुए वन विभाग ने उसे पिंजरे में रेस्क्यू किया। उसे वहां मांस और पानी दिया गया और लगातार एआई (AI) कैमरों की मदद से निगरानी की गई। डॉक्टरों की टीम ने उसे बचाने का हर संभव प्रयास किया, लेकिन शावक के शरीर में कोई सुधार नहीं दिखा और सोमवार सुबह उसकी मृत्यु हो गई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अखिलेश मिश्रा ने शव का पीएम किया। पोस्टमॉर्टम में पता चला कि शावक ‘निमोनिया’ से ग्रस्त थी। इसके साथ ही उसके पिछले बाएं पैर में पुरानी चोट के निशान भी मिले। डॉक्टरों का मानना है कि बीमारी और पैर की चोट की वजह से वह अपनी मां और बाकी भाई-बहनों के साथ चल नहीं पा रही होगी, जिसके कारण मां बाघिन ने उसे अकेला छोड़ दिया होगा। सम्मान के साथ किया गया अंतिम संस्कार राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के नियमों का पालन करते हुए पेंच टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर की मौजूदगी में शावक का अंतिम संस्कार (भस्मीकरण) किया गया। वन विभाग अब इस पूरी घटना की विस्तृत रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजने की तैयारी कर रहा है।


