रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने के लिए कराया गया सर्वेक्षण:नीलगाय से फसल बचाने के लिए उठाया कदम, 50 से अधिक गांव हॉट स्पॉट

किसानों की फसलों को नीलगाय से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए जिला प्रशासन ने वन विभाग को रेस्क्यू ऑपरेशन अभियान चलाने के निर्देश दिए थे। इसके तहत वन विभाग ने अभियान शुरू करने से पहले उन इलाकों में सर्वे कराया, जहां नीलगाय का प्रकोप अधिक है। सर्वे में 50 से अधिक गांव चिन्हित वन विभाग की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, इंदौर जिले की सभी तहसीलों में करीब 50 गांव ऐसे हैं, जहां नीलगाय के कारण किसानों को हर साल भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इन गांवों को हॉटस्पॉट के रूप में चिन्हित किया गया है। देपालपुर, सांवेर, महू और मानपुर प्रमुख हॉट स्पॉट वन विभाग के अनुसार देपालपुर, सांवेर, महू, मानपुर और इंदौर की दतौनी फायर रेंज क्षेत्र में नीलगाय के सबसे अधिक हॉटस्पॉट पाए गए हैं। इनमें अकेले देपालपुर तहसील के कई गांव शामिल हैं। देपालपुर के ये गांव सबसे अधिक प्रभावित देपालपुर तहसील में शाहपुरा, नौगावा सर्फ, सुमठा, नान्द्रा, गंगाजलखेड़ी, अटाहेड़ा, सुनाला, कटकोदा, पितावली, गुडर, रुद्राख्या, खडोतिया, बान्याखेड़ी, उजालिया, खाडिया, बड़ोदिया, मुरखेडा, नैवरी, चाटवाड़ा, अजन्दा और सुनावदा जैसे गांवों में नीलगाय का प्रकोप सबसे ज्यादा बताया गया है। इन गांवों के किसानों का कहना है कि जिसे प्रशासन नीलगाय कहता है, वह वास्तव में जंगली घोड़े जैसी प्रजाति है, जो फसलों को भारी नुकसान पहुंचाती है। किसानों ने प्रशासन और सरकार से बिना डर ठोस कार्रवाई की मांग की है। वन विभाग का दावा- सर्वे के आधार पर कार्रवाई
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि विभागीय कर्मचारियों के माध्यम से नीलगाय से प्रभावित क्षेत्रों का विस्तृत सर्वे कराया गया। सर्वे रिपोर्ट में सांवेर, देपालपुर, दतौनी फायर रेंज, महू फॉरेस्ट रेंज और मानपुर फॉरेस्ट रेंज को प्रमुख हॉटस्पॉट के रूप में चिन्हित किया गया है। हर साल 30 प्रतिशत तक फसल नुकसान
सांवेर के मुरादपुर गांव के किसान एवं भाजपा किसान मोर्चा के जिला मंत्री अरविंद सिंह राठौर ने बताया कि अकेले मुरादपुर ही नहीं, बल्कि आसपास के कई गांवों में नीलगाय हर साल फसलें चट कर जाती है। इससे किसानों को करीब 30 प्रतिशत तक फसल नुकसान उठाना पड़ता है।उन्होंने बताया कि किसान इस समस्या को लेकर तहसील से लेकर सांसद और जिला प्रशासन तक कई बार गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। देपालपुर में सबसे ज्यादा असर
देपालपुर तहसील के शाहपुरा गांव के किसान लाखन सिंह गहलोत ने बताया कि देपालपुर तहसील के करीब 20 गांवों में नीलगाय का सबसे अधिक कहर है। उन्होंने कहा कि पटवारी से लेकर विधायक, मंत्री और सांसद तक को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन किसानों को अब तक इस संकट से राहत नहीं मिल पाई है।

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