संविधान के खिलाफ…बैन, कुछ इस तरह के पोस्टर जब भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन के कार्यकर्ताओं ने प्रदेश के अलग-अलग जिलों में लगाए गए तो पुलिस ने भी शिकायत के बाद ताबड़तोड़ कार्रवाई करना शुरू कर दिया। प्रदेश के सीधी, रीवा, सिंगरौली, नरसिंहपुर, जबलपुर सहित कई जिलों में पुलिस ने एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं को अपराधियों की तरह घरों से उठाकर जब गिरफ्तार किया तो कांग्रेस के दिग्गज नेता भी इस कार्रवाई के विरोध में सड़क पर उतर आए। मध्यप्रदेश के पूर्व मंत्री और विधायक लखन घनघोरिया रात तीन बजे जबलपुर के सिविल लाइन थाने में जाकर धरने पर बैठ गए। काफी देर तक चले हंगामे के बीच पुलिस ने एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं को छोड़ तो दिया पर दिन में फिर से गिरफ्तार कर लिया। एनएसयूआई के खिलाफ पुलिस की यह कार्रवाई प्रदेश के कई जिलों में चली, जिसके खिलाफ अब एनएसयूआई लामबंद हो गई है। पहले समझ ले शुरुआत कहां से हुई मध्यप्रदेश एनएसयूआई संगठन के आव्हान पर शनिवार को एक साथ प्रदेश के कई जिलों में कार्यकर्ताओं ने आरएसएस बैन के पोस्टर कॉलेज और विश्वविद्यालय में लगाए। पोस्टर में लिखा, आरएसएस संविधान के खिलाफ। इसके खिलाफ फिर विश्वविद्यालय ने पुलिस में यह कहते हुए शिकायत दर्ज करवाई कि इस तरह के पोस्टर से शहर का वातावरण और माहौल खराब हो रहा है। पुलिस ने रीवा, सीधी, नरसिंहपुर सहित कई जिलों में एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया। जबलपुर में पकड़ा नोटिस देकर छोड़ा प्रदेश के अन्य जिलों की तरह क्राइम ब्रांच और जबलपुर पुलिस ने भी रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय की शिकायत पर एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया। सिविल लाइन थाना पुलिस और क्राइम ब्रांच ने एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्याय अमित मिश्रा सहित अन्य चार लोगों को यूनिवर्सिटी में जबरन पोस्टर लगाने के आरोप में शनिवार की रात को हिरासत में लेकर थाने लेकर आई। जानकारी जब प्रदेश के पूर्व मंत्री और विधायक लखन घनघोरिया लगी तो वह भी देर रात समर्थकों के साथ थाने पहुंचे और धरना दे दिया। विधायक का यह धरना देर रात साढ़े तीन बजे तक चला। पूर्व मंत्री का कहना था कि जिस तरह से पुलिस ने यह कार्रवाई की है, बताता है कि अपराधियों जैसा सलूक किया गया है। विधायक के धरना देने के चलते पुलिस ने देर रात को ही को 91 का नोटिस देकर छोड़ दिया। रविवार की दोपहर फिर लिया हिरासत में सिविल लाइन थाना पुलिस ने शनिवार की रात को एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष अमित मिश्रा और प्रदेश महासचिव नीलेश महार को हिरासत में लेकर छोड़ तो दिया पर रविवार दोपहर को फिर से दोनों को गिरफ्तार कर लिया। इस दौरान पुलिस ने मोहम्मद अली प्रदेश महासचिव और अनुज यादव प्रदेश सचिव को भी आरोपी बनाया है, जिनकी तलाश जारी है। पुलिस ने रविवार को अमित मिश्रा और नीलेश महार को कोर्ट में पेश किया, जहां से दोनों को जमानत पर छोड़ दिया गया। जबलपुर पुलिस की इस कार्रवाई के बाद अब जिला एनएसयूआई संगठन आंदोलन की तैयारी में जुट गई है। नॉन रजिस्टर्ड संगठन है एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष चौकसे का कहना है कि पूरे देश में जो नॉन रजिस्टर्ड संगठन हैं, उनके द्वारा प्रदेश में लगातार धार्मिक उन्माद फैलाया जाता है और देश के संस्थानों में कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। इनकी सोच संविधान और महिला विरोधी है। जिसके विरोध में एनएसयूआई ने प्रदेश के कई कॉलेज और विश्वविद्यालय में जब प्रदर्शन किया, पोस्टर लगाए तो हमारे खिलाफ पुलिस ने बर्बरतापूर्ण कार्रवाई की। जबलपुर में तो रात को एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करने के बाद आतंकवादियों जैसा व्यवहार किया गया। स्थानीय विधायकों के द्वारा जब पुलिस पर दबाव बनाया गया तो उन्हें रात को छोड़ तो दिया, पर दोबारा फिर से पुलिस ने रविवार की दोपहर को गिरफ्तार कर लिया। एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर सीएसपी सोनू कुर्मी ने कहा- विश्वविद्यालय की शिकायत पर ही एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था। उनके द्रार जिस तरह के पोस्टर लगाए गए यह पूरी तरह से गलत थे। रविवार की दोपहर को अमित मिश्रा को हिरासत में लेने के बाद कोर्ट में पेश किया गया था।


