ब्यावर में 20 साल के मुमुक्षु अनीश कांठेड़ के सम्मान में सोमवार को नगर में एक भव्य वरघोड़ा (शोभायात्रा) निकाला गया। अनीश सांसारिक सुखों और भौतिक वैभव का त्याग कर संयम मार्ग अपनाने जा रहे हैं। वह 28 जनवरी बुधवार को बीकानेर जिले के उदासर गांव में जैनाचार्य रामलाल महाराज के मुखारविंद से दीक्षा ग्रहण कर जैन संत जीवन अंगीकार करेंगे। इस विराट आयोजन में सकल जैन समाज सहित विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं राजनीतिक संगठनों के प्रमुख उपस्थित रहे। सामूहिक नवकार महामंत्र की रही गूंज
इधर सोमवार सुबह लोकाशाह नगर स्थित वीर माता नीता कांठेड़ के निवास से वरघोड़े का शुभारंभ हुआ। इस दौरान सामूहिक नवकार महामंत्र की गूंज और भगवान महावीर, आचार्य नानेश, आचार्य रामेश एवं उपाध्याय प्रवर राजेश मुनि के जयघोष किए गए। ढोल-नगाड़ों और बैंड-बाजों की धुन पर यह शोभायात्रा लोकाशाह नगर से मेवाड़ी गेट, सिटी डिस्पेंसरी, श्री टॉवर, महावीर बाजार, एकता सर्कल, पाली बाजार, लोहारन चौपड़, मालियान चौपड़ होते हुए आचार्य नानेश मार्ग स्थित समता भवन पहुंची। जुलूस मार्ग जैन धर्म के भजनों, गीतों और मुक्तकों से गुंजायमान रहा। फूलों की बारिश से हुआ स्वागत-सत्कार
मार्ग में जगह-जगह पुष्पवर्षा कर, शाल-साफा, मोतियों की माला और स्मृति चिन्ह भेंट कर मुमुक्षु का आत्मीय स्वागत किया गया। मुमुक्षु अनीश, उनकी माता नीता कांठेड़ और बहनें विशेष विरति रथ में सवार होकर आमजन का अभिवादन स्वीकार करती रहीं और प्रभावना वितरित की।
समता भवन पहुंचने पर आचार्य रामलाल महाराज के संत एवं महासती मंडल ने मुमुक्षु को आशीर्वचन प्रदान किए।


