1990 बैच के IPS अधिकारी अनुराग गुप्ता राज्य के स्थायी डीजीपी होंगे। झारखंड सरकार ने उनकी स्थायी नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। उनकी स्थायी नियुक्ति को लेकर अधिसूचना कभी भी जारी हो सकती है। बतौर स्थायी डीजीपी उनका कार्यकाल 2 साल का होगा। उनका कार्यकाल 26 जुलाई 2026 तक होगा। IPS अनुराग गुप्ता अभी झारखंड के प्रभारी डीजीपी हैं। उनके पास CID डीजी का भी पद है। वह ACB के डीजी पद के अतिरिक्त प्रभार में भी हैं। साल 2022 में सरकार ने अनुराग गुप्ता को डीजी रैंक में प्रोन्नति दी थी। प्रोन्नति मिलने के बाद वह डीजी ट्रेनिंग के पद पर पदस्थापित रहें। 26 जुलाई 2024 को सरकार ने उन्हें झारखंड का प्रभारी डीजीपी बनाया था। फिर चुनाव के दौरान उन्हें पद से हटाया गया था। जब अजय कुमार सिंह को प्रभार दिया गया था। नई नियमावली ने नियुक्ति का रास्ता किया साफ दरअसल झारखंड में डीजीपी नियुक्ति को लेकर अक्सर विवाद होता रहता था। इसे दूर करने के लिए राज्य सरकार ने के पुलिस महानिदेशक के चयन और नियुक्ति नियमावली-2024 बनाई। इस नियमावली को 26 दिन पहले हुई बैठक में मंजूरी दी गई। इसी नियमावली ने राज्य को स्थायी डीजीपी बनाने का रास्ता खोला। अब तक डीजीपी के चयन के लिए पहले संघ लोकसेवा आयोग को राज्य सरकार आईपीएस अधिकारियों के नामों का पैनल भेजती थी, जिसमें से तीन नामों को स्वीकृत कर यूपीएससी उसे फिर राज्य सरकार को भेजता था। उन्ही तीन नामों से किसी एक को राज्य सरकार डीजीपी बनाती थी। पर, अब ऐसा नहीं है। नई नियमावली के मुताबिक डीजीपी का चयन हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस की अध्यक्षता में बनी कमेटी करती है। इसलिए बनी है नई नियमावली वर्ष 2019 से डीजीपी के पैनल को लेकर यूपीएससी और राज्य सरकार के बीच विवाद होता रहा है। यही नहीं, पहले पैनल भेजने से लेकर डीजीपी की नियुक्ति तक करीब तीन-चार महीने का समय लग जाता था। नई व्यवस्था होने से अब सरकार को यूपीएससी को अधिकारियों के नाम का पैनल नहीं भेजना होगा, बल्कि यूपीएससी के अधिकारी ही यहां आएंगे। इससे समय भी बचेगा। 4 साल पहले हेमंत सरकार ने किया था सस्पेंड 14 फरवरी 2020 को हेमंत सरकार ने अनुराग गुप्ता को सस्पेंड कर दिया था। तब वे CID के ADG थे। उनके खिलाफ राज्यसभा चुनाव 2016 में भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में वोट देने के लिए बड़कागांव की तत्कालीन विधायक निर्मला देवी को लालच देने और उनके पति पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को धमकाने का आरोप लगा था। क्या था पूरा मामला दरअसल, 2016 में राज्यसभा चुनाव के बाद बाबूलाल मरांडी ने एक ऑडियो टेप जारी किया था। इस कथित टेप में उस समय के ADG अनुराग गुप्ता, तत्कालीन विधायक निर्मला देवी, उनके पति योगेंद्र साव के बीच बातचीत की बात सामने आई थी। मामला सामने आने के बाद पूरे मामले की शिकायत चुनाव आयोग से की गई थी। शुरुआती जांच के बाद चुनाव आयोग ने FIR का आदेश दिया था। गृह विभाग के अवर सचिव अवधेश ठाकुर के बयान पर सरकार ने तब मामला दर्ज करवाया था। इस मामले में फरवरी महीने में अनुराग गुप्ता के सस्पेंशन के बाद राज्य सरकार ने विभागीय कार्रवाई शुरू की थी जिसके संचालन का जिम्मा DGP एमवी राव को दिया गया था।


