सोलर प्लांट प्रोजेक्ट:राजस्थान के अफसरों की कारिस्तानी; ​​​​​​​2222 करोड़ के प्रोजेक्ट में बड़ी कंपनियों के लिए बदल दी शर्त

सरकारी विभागों का बिजली का बिल जीरो करने के लिए राजस्थान के सभी सरकारी कार्यालयों की छतों पर सोलर प्लांट लगाने की तैयारी हो चुकी है। इसके लिए राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम (आरआरईसी) ने हाईब्रिड एन्युटी मॉडल (हेम) के तहत 22 जिलों में स्थित सरकारी दफ्तरों के रूफटॉप पर 511 मेगावाट क्षमता के प्लांट लगाने के लिए गत दिसंबर में बिड जारी की। केंद्र सरकार के निर्देश पर इसमें स्टार्टअप और छोटी कंपनियों को मौका देने के लिए प्रत्येक जिले में कम से कम 5 मेगावाट और अधिकतम 100 मेगावाट क्षमता तक का आवेदन करने की शर्त थीं। लेकिन गत 23 जनवरी को इसकी अंतिम तिथि बढ़ाकर 28 जनवरी कर दी। इसमें गुपचुप तरीके से प्रदेश के दो जिलों के लिए नियम में संशोधन कर दिया। इनमें जोधपुर के लिए कम से कम 25 और जयपुर के लिए 35 मेगावाट क्षमता की अनिवार्यता जारी कर दी। इससे सीधे तौर पर किसी बड़े बड़े कॉरपोरेट प्लेयर के हाथों में दोनों जिलों का प्रोजेक्ट देने की तैयारी है। जबकि राजस्थान ट्रांसपेरेंसी इन पब्लिक प्रिक्योरमेंट एक्ट 2012 के तहत एक बार बिड जारी होने के बाद ऐसी कोई शर्त नहीं डाल सकते, जो बिड को रोकती है। आरआरईसी के प्रोजेक्ट मैनेजर ने बताया कि बिड में संशोधन चेयरमैन और उच्च अफसरों के निर्देश पर किया है। सिर्फ दो जिलों में संशोधन करने से संदेह टेंडर की अवधि सिर्फ 5 दिन बढ़ाने के दौरान ही जयपुर और जोधपुर जिले के लिए शर्त बदलने से पूरी प्रक्रिया संदेह के घेरे में आ गई है। कम से कम 25 और 35 मेगावाट की शर्त जोड़ने से कई छोटे प्लेयर इस दौड़ से बाहर हो गए। इसमें बड़े कॉरपोरेट प्लेयर के हाथ में दोनों शहरों की व्यवस्था जा सकती है। कारण… जोधपुर में 113 o जयपुर में 68 मेगावाट के बड़े प्लांट लगने हैं। ठेका फर्म को 7 साल में पूरी राशि मिलेगी। प्रति मेगावाट साढ़े छह से सात करोड़ लागत है। दोनों शहरों में एक या दो बड़ी कंपनी आती है तो लागत 10 करोड़ प्रति मेगावाट होगी। 25 साल, 2222 करोड़ का प्रोजेक्ट
ऊर्जा विभाग ने पहले तीनों बिजली कंपनियों में निजीकरण की शुरुआत करने के लिए गत दिसंबर में हेम मॉडल लॉन्च किया। अब सरकारी विभागों ने रूफटॉप पर सोलर पैनल लगाने के लिए इसी मॉडल को अपनाया। करीब 2222 करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए अक्षय ऊर्जा निगम कार्यकारी एजेंसी है। ये राशि सरकारी विभाग अक्षय ऊर्जा निगम को देंगे। सरकारी विभागों को बिजली के बिलों के लिए आवंटित होने वाला बजट और अतिरिक्त राशि केंद्र व राज्य सरकार वहन करेगी। हेम मॉडल के तहत नेट-मीटरिंग के साथ डिजाइन, आपूर्ति, निर्माण, परीक्षण और कमीशनिंग करनी है। प्लांट चालू होने से 25 साल के लिए पूरा संचालन और ऑपरेशन व मेंटेनेंस भी उसी कंपनी को करना है। जिम्मेदार बोले- चेयरमैन और उच्च स्तर के निर्देश पर नियमों में बदलाव
ऐनवक्त पर दो शहरों के लिए नियमों में संशोधन करने को लेकर भास्कर ने अक्षय ऊर्जा निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर (रूफ टॉप) हरिओम गुप्ता से बात की। इस पर गुप्ता ने कहा- जयपुर व जोधपुर की सबसे ज्यादा लोड व क्षमता थी। अगर कोई 5 मेगावाट का रेट इस तरह (कम रेट) से डाल दी तो उसे काउंटर ऑफर के रूप में दूसरे ने स्वीकार नहीं किया तो मेरी तो पूरा जयपुर जोधपुर खराब हो जाएगा। ये संज्ञान में आने पर संशोधन डाला गया। ये हमारे चेयरमैन सर के डायरेक्शन थे कि इसकी हायर कैपेसिटी वाले जिलों में कम से कम क्षमता को लिमिट किया जाए। वो कितनी मिनिमम कर सकते हैं। मैं तो छोटा कर्मचारी हूं, हायर मैनेजमेंट के डायरेक्शन थे।

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