समीक्षा बैठक:सिंहस्थ से पहले उज्जैन में बनेंगे 13 नए पुल , इनमें से 8 क्षिप्रा नदी पर

उज्जैन सिंहस्थ- 2028 में भीड़ और आपदा प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए सरकार उज्जैन शहर में 13 नए ब्रिज बनाएगी। इनमें 8 ब्रिज क्षिप्रा नदी पर बनेगें। 5 रेलवे ओवर ब्रिज बनाए जाएंगे। सभी का निर्माण पूरा करने की मियाद 31 दिसंबर 2027 रखी गई है। यह फैसला प्रयागराज महाकुंभ की व्यवस्थाओं और भीड़ की स्थिति का अध्ययन करने के बाद लिया गया है। सीएम के साथ जापान यात्रा से लौटे मुख्यमंत्री कार्यालय के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश राजौरा ने रविवार को सीधे उज्जैन पहुंचकर सिंहस्थ से जुड़े 27 बड़े प्रोजेक्ट की प्रगति की 10 घंटे तक समीक्षा की। एसीएस राजौरा ने अलग-अलग विभागों के अधिकारियों को स्पष्ट किया कि वे बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी परियोजनाओं में भीड़ प्रबंधन के साथ ही आपदा प्रबंधन को भी सर्वोच्च प्राथमिकता में रखें। शाही स्नान वाले दिनों में यदि कोई दुर्घटना होती है, तो रेस्क्यू के लिए अधिकतम रिस्पांस टाइम 15 मिनट होना चाहिए। इसके लिए बार-बार मॉक ड्रिल करके योजना बनाएं कि राहत और बचाव कार्य इसी 15 मिनट के भीतर हो सकें। शाही स्नान के दिन 3 करोड़ श्रद्धालु आने का अनुमान
एसीएस राजौरा ने बताया कि शाही स्नान वाले दिन उज्जैन में 3 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। इसे अभी से ध्यान में रखना जरूरी है। यह ध्यान रखा जाए कि पार्किंग स्थलों से शिप्रा नदी तक आने के लिए श्रद्धालुओं को कई किलोमीटर पैदल न चलना पड़े। क्षिप्रा पर 29 किलोमीटर लंबे नए घाट निर्माण के लिए टेंडर हो चुके हैं। पूरे उज्जैन में क्षिप्रा नदी किनारे एक पैदल पाथवे बनाया जाएगा, कानूनी व्यवस्था के लिए उज्जैन में दो नए थाने महाकाल लोक और तपोभूमि बनाने का प्रस्ताव है। हर विभाग में बनेंगे सिंहस्थ उपखंड सिंहस्थ से जुड़े कामों को प्राथमिकता से पूरा करने के लिए एसीएस ने सभी विभागों को सिंहस्थ के लिए अलग उपखंड बनाने के निर्देश दिए। ताकि प्राथमिकता वाले प्रोजेक्ट पर काम करने वाले अफसरों को रुटीन काम से अलग किया जा सके।
साधु संतों को विश्वास में लेने उनसे भी ली जाएगी राय – अखाड़ों, साधू-संतों के लिए आवंटित स्थान के हिसाब से मैपिंग कराई जाएगी। पहले साधु-संतों का स्थान तय कर उन्हें विश्वास में लिया जाएगा। उनकी स्वीकृति के बाद ही अंतिम आवंटन किया जाएा। 2004 और 2016 में हुए सिंहस्थ की व्यवस्थाओं का अध्ययन करते हुए बोर्डिंग व्यवस्था इस बार पहले ही करने का लक्ष्य रखा है। रेलवे ट्रैक होगा दोनों ओर से कवर
बैठक में तय किया गया कि उज्जैन शहर से जहां से भी रेलवे लाइन गुजरती है, उस पूरे ट्रैक को दोनों ओर से कवर किया जाएगा। सिंहस्थ में आने वाली भीड़ के कारण शहर में हर दिन 740 टन सॉलिड वेस्ट पैदा होगा। इसके लिए 50 हजार बायो टॉयलेट का निर्माण किया जाएगा।

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