दावोस में पाकिस्तानी फ्लैग…भारतीय झंडा क्यों नहीं:इंदौर की डॉ. रोहिणी बोलीं- WEF में हमारा प्रतिनिधित्व बेहतरीन, पर निराशा हुई; सांसद चंद्रशेखर पर लगा चुकी हैं आरोप

यूनाइटेड नेशंस (यूएन) में जय श्रीराम के जयकारे लगाकर और भारत के दलितों की तुलना दूसरे देशों से बेहतर बताकर चर्चा में आई पीएचडी स्कॉलर और इंदौर की डॉ. रोहिणी घावरी ने रविवार को केंद्र सरकार से सवाल पूछा है। रोहिणी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा- दावोस (स्विट्जरलैंड) में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) पर भारत का प्रतिनिधित्व बेहतरीन होता है, पर वहां हमारा झंडा नहीं है। क्या वजह हो सकती है। पाकिस्तान जैसे देश का झंडा तीसरे नंबर पर था, लेकिन भारत का नहीं…क्यों? रोहिणी ने लिखा- भारत का झंडा नहीं होने से ज्यादा निराशा पाकिस्तान का झंडा होने से मिली। दावोस और WEF में पाकिस्तान का मुकाम भारत की तुलना में बहुत कम है। रोहिणी ने इस पोस्ट को पीएमओ के साथ #WEF2026 #switzerland #Davos2026 को भी टैग किया है। रोहिणी ने उस जगह का फोटो भी शेयर किया है, जहां बाकी देशों के साथ पाकिस्तान का झंडा तीसरे नंबर पर है जबकि भारत का झंडा ही नहीं है। पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है
रोहिणी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा- इसमें कोई शक नहीं कि यहां भारत को नई उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है। पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है। जल्द ही यूरोपियन यूनियन के साथ मदर ऑफ ऑल डील्स होने जा रही है, ताकि यूरोपीय देशों की चीन पर निर्भरता कम की जा सके। रोहिणी ने आगे कहा कि वहां भारत के अलग-अलग राज्यों के दस मुख्यमंत्री भी शामिल हुए, जो WEF में हमारी ताकत दिखाता है। WEF 2026 भारत के लिए अहम क्यों?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 भारत के लिए काफी अहम है। इस मंच पर भारत अपनी मजबूत अर्थव्यवस्था, निवेश के मौके और भविष्य की योजनाओं को दुनिया के सामने रख रहा है। सरकार और उद्योग जगत के बड़े नेता यहां एक साथ पहुंचकर भारत को निवेश और साझेदारी के लिए आकर्षक देश के तौर पर पेश कर रहे हैं। WEF 2026 में भारत से जुड़ी अहम बातें इस खबर पर आप अपनी राय दे सकते हैं… इंदौर में डॉ. रोहिणी के पिता सफाईकर्मी हैं
डॉ. रोहिणी घावरी इंदौर की रहने वाली हैं और वाल्मीकि समुदाय से आती हैं। उनके पिता इंदौर के एक बीमा अस्पताल में सफाई कर्मचारी के पद पर कार्यरत हैं। बेहद साधारण बैकग्राउंड से आने के बावजूद रोहिणी ने शिक्षा और आत्मविश्वास के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। उन्होंने स्विट्जरलैंड की एक यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा प्राप्त की और पीएचडी के लिए एक करोड़ रुपए की स्कॉलरशिप भी हासिल की थी। उन्होंने बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में पीएचडी की है। इससे पहले उन्होंने इंस्टीट्यूट ऑफ कॉमर्स से फॉरेन ट्रेड में बीबीए किया और उसके बाद इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट से मार्केटिंग में एमबीए की पढ़ाई की थी। पांच साल से स्विट्जरलैंड में यूएन में स्कॉलर
रोहिणी बीते पांच सालों से स्विट्जरलैंड में यूएन में स्कॉलर हैं और एक NGO भी चला रही हैं, जो सामाजिक मुद्दों पर काम करता है। साल 2019 में वह पढ़ाई के सिलसिले में विदेश गई थीं और वहीं से उनका संपर्क यूपी के नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद से हुआ। इसके बाद दोनों के बीच विवाद हुआ और रोहिणी ने आत्महत्या की धमकी दी थी। डॉ. रोहिणी से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…
इंदौर की रोहिणी का चंद्रशेखर आजाद पर बड़ा खुलासा:बोलीं- मायावती को अपशब्द कहे इंदौर की रहने वाली रोहिणी ने यूपी की नगीना लोकसभा सीट से सांसद और भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद पर उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। जिस पर उनके समर्थकों ने रोहिणी पर FIR दर्ज कराई है। जबकि रोहिणी का कहना है कि मैंने समाज को जागरूक करने के लिए वीडियो शेयर किया था। पढ़ें पूरी खबर…

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