भास्कर न्यूज | जालंधर पंजाब रोडवेज, पनबस व पीआरटीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन की मीटिंग हुई, जिसमें पंजाब के विभिन्न विभागों और ट्रांसपोर्ट से जुड़ी अलग-अलग यूनियनों के पदाधिकारी मौजूद रहे। इनमें बिजली बोर्ड पावरकॉम/ट्रांसको से प्रदेश अध्यक्ष बलिहार सिंह, जल सप्लाई व सेनिटेशन विभाग से गुरदीप सिंह, टोल प्लाजा मुलाजिम यूनियन से प्रदेश अध्यक्ष राजवंत सिंह, फायर ब्रिगेड यूनियन से अध्यक्ष सुखविंदर सिंह, आंगनवाड़ी यूनियन से अध्यक्ष आशा रानी, पंजाब रोडवेज संयुक्त एक्शन कमेटी से अध्यक्ष हरकेवल राम, बीरा सिंह, बलजिंदर सिंह तथा पीआरटीसी आज़ाद यूनियन से अध्यक्ष हरबंस सिंह भोला सहित विभिन्न संगठनों के नेता मौजूद रहे। मीटिंग के दौरान सरकार की निंदा करते हुए कहा गया कि लंबे समय से यूनियनें अपनी मांगों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रही हैं, लेकिन सरकार ने अब तक उनकी मांगों की ओर कोई ध्यान नहीं दिया है। बैठक में पंजाब के सभी विभाग मौजूदा पंजाब सरकार से नाराज नजर आए। नेताओं ने कहा कि सरकार ने किसी भी विभाग की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया है और न ही कच्चे कर्मचारियों को रेगुलर करने के लिए कोई नीति बनाई गई है। इसके उलट सरकार टालमटोल की नीति अपना रही है तथा संघर्ष कर रहे कर्मचारियों की आवाज दबाने के लिए उनके खिलाफ मामले दर्ज किए जा रहे हैं। नेताओं ने बताया कि पंजाब रोडवेज, पनबस व पीआरटीसी के निजीकरण के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले कर्मचारियों और नेताओं को जबरन उनके घरों से उठाकर जेलों में बंद कर दिया गया। दो महीने बीत जाने के बावजूद संगरूर जेल में बंद नेताओं को अभी तक रिहा नहीं किया गया है। इस संदर्भ में 9 जनवरी को संगरूर में कन्वेंशन भी की गई थी। यूनियन के बढ़ते रोष को देखते हुए 11 जनवरी को परिवहन मंत्री द्वारा बैठक कर यह भरोसा दिलाया गया था कि जल्द ही मुख्यमंत्री पंजाब से संपर्क कर कर्मचारियों पर दर्ज मामले रद्द करवाकर उन्हें रिहा किया जाएगा और 21 जनवरी की बैठक में मांगों का पुख्ता समाधान निकाला जाएगा। हालांकि 21 जनवरी की बैठक को स्थगित कर 28 जनवरी को रखा गया है। यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि जल्द उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो संघर्ष को और तेज किया जाएगा।


