सुप्रीम कोर्ट ने उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में ‘वीआईपी दर्शन’ व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। इसमें मांग की गई थी कि मंदिर के गर्भगृह में दर्शन और पूजा के लिए वीआईपी और सामान्य श्रद्धालुओं के बीच कोई भेदभाव न हो। सभी को समान अवसर मिले। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान साफ किया कि इस तरह के विषय अदालत के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते। जो प्रशासन चला रहे हैं, वे इस पर फैसला लें। हम केवल ज्यूडिशिएबिलिटी से जुड़े सवाल देखते हैं। सुनवाई के दौरान सीजेआई ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, ‘महाकाल के सामने कोई वीआईपी नहीं होता।’ दर्पण अवस्थी की ओर से दायर याचिका पर वकील विष्णु शंकर जैन ने कोर्ट में दलील दी कि गर्भगृह में प्रवेश को लेकर एक समान और स्पष्ट नीति होनी चाहिए। कोर्ट की मौखिक टिप्पणी आज प्रवेश, कल मंत्र, सभी हक गर्भगृह में लागू होंगे?
मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि लोग इसलिए गर्भगृह में प्रवेश की मांग करने लगते हैं क्योंकि वे देखते हैं कि कोई और ऐसा कर रहा है। उन्होंने कहा- ‘फिर वे कहेंगे कि मंत्र पढ़ना उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है। क्या सभी मौलिक अधिकार गर्भगृह के भीतर लागू किए जाएंगे?’ सीजेआई ने यह भी कहा कि इस तरह की याचिकाएं दाखिल करने वाले लोग वास्तविक श्रद्धालु नहीं होते।


