एक फरवरी को माघ पूर्णिमा का व्रत रहेगा। सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग पूर्णिमा को खास बनाएगा। इस दिन कल्पवास की भी समाप्ति होगी। साथ ही अस्त चल रहे शुक्र ग्रह के उदित होने से मांगलिक कार्य भी आरंभ होंगे। हिंदू धर्म में माघ मास की पूर्णिमा बहुत ही शुभ मानी गई है। इसे माघी पूर्णिमा भी कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार माघ मास में देवता पृथ्वी लोक में निवास करते हैं। माघ पूर्णिमा पर देवता तीर्थराज प्रयाग के संगम में स्नान करते हैं। साधक संगम में एक मास के कल्पवास पर रहते हैं। संगम, गंगा जैसी पवित्र नदियों में स्नान कर दानपुण्य करते हैं। माघ पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी, भगवान विष्णु और चंद्रदेव की पूजा का विधान है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और स्नान-दान करने से साधकों को पापों से मुक्ति मिलती है। माघ पूर्णिमा पर तालाब व नदियों में श्रद्धालु स्नान के लिए उमड़ेंगे। ज्योतिषाचार्य प्रणव मिश्रा के अनुसार अभी शुक्र ग्रह अस्त चल रहा है। इस कारण मकर संक्रांति की समाप्ति के बाद भी मांगलिक कार्य आरंभ नहीं हो पाया है। एक फरवरी को शाम 6 बजे शुक्र ग्रह पश्चिम मंे उदित होंगे। इसके बाद 4 फरवरी से शादियों का लग्न आरंभ होगा। माघी पूर्णिमा को सनातन धर्मावलंबी स्नान-दान, पूजा-पाठ, दान-पुण्य और धार्मिक कृत्य करेंगे। ब्रह्म वैवर्त पुराण के अनुसार माघी पूर्णिमा पर भगवान नारायण स्वयं गंगाजल में विराजमान रहते हैं। इसीलिए इस दिन गंगाजल के स्पर्श करने से भी शुभ संयोग बनता है। गंगा में स्नान करने से मनुष्य के समस्त पाप और संताप मिट जाते हैं। पंचांग के मुताबिक माघ में स्नान, दान, धर्म-कर्म का विशेष महत्व है। इस दिन यज्ञ, तप और दान करना शुभ फलदायी है। इस दिन चंद्रदेव भी अपनी सोलह कलाओं से शोभायमान होते हैं। पूर्ण चंद्रमा अमृत वर्षा करते हैं। इसका अंश वृक्षों, नदियों, जलाशयों और वनस्पतियों पर पड़ता है, इसीलिए इनमें आरोग्य दायक गुण उत्पन्न होते हैं। माघ पूर्णिमा में स्नान-दान करने से सूर्य और चंद्रमा युक्त दोषों से मुक्ति मिलती है।


