कार्यक्रम का दूसरा चरण काव्य गोष्ठी के रूप में आयोजित किया गया, जिसमें हिंदी और पंजाबी के लगभग 20 कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। इस दौरान देशभक्ति से जुड़ी कविताओं ने भी विशेष प्रभाव छोड़ा। राष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाले मनवीर धीमान ने अपनी खूबसूरत गजल से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। इसके अलावा जगजीत सिंह, गुरम, तरनजीत सिंह गुलाटी, धर्मपाल स्नेही, अशफाक जिगर, शरीफ अहमद, दिलीप अवध, जोरावर सिंह पंछी, मीत पानीपत, नेम और काजल ने भी भास्कर न्यूज़| लुधियाना प्रीत साहित्य सदन की मासिक सभा के दौरान दो पुस्तकों का विधिवत विमोचन किया गया। इस अवसर पर डॉ जवाहर धीर फगवाड़ा की पुस्तक मां कभी मरती नहीं और दिलीप कुमार पांडे की पुस्तक ‘मैं समय हूं’ का विमोचन किया गया। पुस्तकों पर पत्र पाठ करते हुए ममता जैन और डॉ. अनु शर्मा ने कहा कि दोनों ही पुस्तकें संवेदना और भावनाओं का समृद्ध संसार प्रस्तुत करती हैं। मां कभी मरती नहीं में मां जैसे मार्मिक रिश्ते को अटूट रूप में बहुत सुंदरता से उकेरा गया है, जिसमें रिश्तों की संरचना और परंपराओं के प्रति गहरी प्रतिबद्धता दिखाई देती है। वहीं ‘मैं समय हूं’ में कवि की भावनाओं के साथ जीवन और समाज से जुड़े अद्भुत सरोकार स्पष्ट रूप से झलकते हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए और दीप प्रज्ज्वलन के अवसर पर डॉ. यश चोपड़ा ने कहा कि साहित्य मानव को सदैव जीवित रखता है और मानवता व समाज की बुनियाद साहित्य पर ही आधारित होती है। अपनी गजलों और कविताओं से वातावरण को बेहद सुखद बना दिया। कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना रमा शर्मा द्वारा की गई। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए डॉ. संजीव डाबर ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया और सदन की गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सदन का उद्देश्य साहित्य को समृद्ध करने के साथ-साथ नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ना है।


