मेडिकल कॉलेज में नए मैनपावर टेंडर के बाद रविवार को प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से लगे पुराने 500 से अधिक कार्मिकों की सेवाएं समाप्त कर दी गईं। ऐसे में जिला अस्पताल में दो दिन से व्यवस्थाएं प्रभावित हैं। वैकल्पिक व्यवस्थाओं के तौर पर बीएससी नर्सिंग व जीएनएमटीसी के स्टूडेंट्स जरूर लगाए हैं, लेकिन ओपीडी काउंटर, ब्लड कलेक्शन सेंटर, सेंट्रल लैब, ओटी, लेबर रूम सहित सभी वार्डों में व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं। स्टाफ की कमी के चलते मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मंगलवार को अस्पताल में 4 हजार से अधिक मरीज पहुंचे। इनमें से करीब 150 मरीजों को जांच के बाद भर्ती किया, लेकिन स्टाफ की कमी के चलते कई वार्ड मरीजों से खाली नजर आए। भास्कर लाइव – ओपीडी काउंटर व ब्लड सेंटर पर लंबी कतारें, 14 में से 8 दवा काउंटर बंद ओपीडी काउंटर पर कंप्यूटर ऑपरेटर की संख्या कम होने से सुबह से दोपहर तक मरीजों की लंबी कतारें रहीं। मरीजों को पर्ची कटाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। डॉक्टर ओपीडी के बाहर भी गार्ड नहीं होने से अव्यवस्थाओं का आलम दिखा। ब्लड कलेक्शन सेंटर पर लंबी कतारें रहने से मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। स्टूडेंट्स की ओर से मरीजों के ब्लड सैंपल लिए गए। ब्लड कलेक्शन सेंटर पर रोजाना 450 से अधिक मरीजों के कलेक्शन के स्थान पर 150 मरीजों के ही सैंपल लिए गए। दोपहर तक सेंट्रल लैब के पैथोलॉजी व बायोकेमेस्ट्री विभाग में एक ही लैब टेक्नीशियन के भरोसे रही। बायोकेमेस्ट्री विभाग में हार्मोन की जांच बंद रही। प्लेसमेंट एजेंसी से लगे 21 फार्मासिस्ट नहीं होने से 14 में से 8 निशुल्क दवा काउंटर (डीडीसी) अस्पताल प्रशासन को बंद रखने पड़े। मरीजों को दवा लेने में भी दिक्कतें रहीं। सेंट्रल लैब में 37 लैब टेक्नीशियन व लैब सहायक नहीं होने से जांचें प्रभावित रहीं। डॉक्टरों को मौखिक आदेश है कि गंभीर रोगियों को ही भर्ती किया जाए। कंप्यूटर ऑपरेटर नहीं, मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना की एंट्री आधे से कम कंप्यूटर ऑपरेटरों की कमी के चलते मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना में भर्ती मरीजों के क्लेम एंट्री आधे से भी कम की गई। रोजाना 5 से 10 लाख के क्लेम के स्थान पर एंट्री नहीं होने से 2 से ढाई लाख की ही एंट्री हुई। सेंट्रल लैब में लगे 26 एलटी के जाने से 8 कार्मिकों के भरोसे संचालित हो रही है। ब्लड बैंक में 14 के स्टाफ के स्थान पर 5 कार्मिकों से काम चलाया गया। मरीजों के ब्लड के क्रॉस मैच लगाने में भी स्टाफ की कमी के चलते देरी रही। ब्लड सेपरेशन यूनिट का कार्य भी प्रभावित रहा। ब्लड सेंटर से 31 जनवरी को होने वाले रक्तदान शिविर की अनुमति नहीं दी गई। हेल्पर गार्ड नहीं होने से वार्डों में मरीजों की जांच रिपोर्ट भी समय पर नहीं आने से डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ परेशान दिखा। “अस्पताल में प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से लगे कार्मिक हटने के बाद वैकल्पिक व्यवस्था की है। सभी डॉक्टर्स, नर्सिंग स्टाफ व पैरा मेडिकल स्टाफ के अवकाश पर रोक लगा दी है। सीएमएचओ से फार्मासिस्ट व लैब टेक्नीशियन की डिमांड की है। सेंट्रल लैब में स्टाफ की कमी के चलते जांचे प्रभावित है।” – डॉ. हनुमानराम चौधरी, अधीक्षक, जिला अस्पताल।


