उज्जैन को इंदौर और जावरा से जोड़ने के लिए बनाए गए करीब 7 हजार करोड़ की दो ग्रीन फील्ड सड़कों का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। दोनों सड़कों से प्रभावित उज्जैन, इंदौर और रतलाम जिले के 90 गांव के किसानों ने अब बड़े आंदोलन की तैयार कर ली। सभी 25 फरवरी से उज्जैन में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने की योजना बना ली है। आंदोलन को लेकर सोमवार शाम को उज्जैन-इंदौर ग्रीन फील्ड प्रभावित 28 गांवों के किसानों की इंदौर जिले के ग्राम चित्तौड़ा में बैठक हुई। इसमें किसानों ने आरपार की लड़ाई की योजना बना ली। उज्जैन और इंदौर जिले की किसानों की इस संयुक्त मीटिंग में आगामी 25 फरवरी से अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। प्रदर्शन उज्जैन कलेक्टोरेट परिसर में होगा। बैठक में निर्णय लिया कि आरपार की इस लड़ाई में उज्जैन-इंदौर ग्रीन फील्ड रोड के 28 गांवों के साथ ही उज्जैन-जावरा रोड प्रभावित 62 गांव के किसानों ने भी शामिल होने की सहमति दे दी है। यानी उज्जैन जिले के किसानों के साथ इस आंदोलन में उक्त दोनों ग्रीन फील्ड सड़कों से प्रभावित इंदौर व रतलाम जिले के गांव के किसान भी शामिल होंगे। उज्जैन के 56 गांव प्रभावित
शहर को इंदौर और जावरा से जोड़ने के लिए दो ग्रीन फील्ड एक्सिस कंट्रोल रोड बनाए जाना है। जिले को इंदौर से जोड़ने वाले ग्रीन फील्ड से उज्जैन के 7 और इंदौर जिले के 21 गांव प्रभावित होंगे। वहीं उज्जैन-जावरा ग्रीन फील्ड से उज्जैन के 49 और रतलाम जिले के 13 गांव प्रभावित हो रहे हैं। दोनों हाई-वे में कुल 56 गांव प्रभावित होंगे। भाव ऊंचा, सड़क नीचे पर अड़े
चांदमुख निवासी नरेंद्र आंजना और हासामपुरा निवासी राजेश सोलंकी ने बताया प्रभावित किसानों की सिर्फ दो ही मांगें हैं। जमीन का भाव (मुआवजा) ऊंचा और हाई-वे नीचा हो। आगामी 25 फरवरी को उज्जैन कलेक्टोरेट के पास सभी प्रभावित किसान संयुक्त रूप से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे। विरोध इसलिए : 15 फीट ऊपर से निकाल रहे हाइवे
दोनों ग्रीन फील्ड सड़कों को जमीन से करीब 15 फीट ऊंचाई से निकाली जाना है। दोनों ही ग्रीन फील्ड हाई-वे से बीच में आने वाले प्रभावित गांवों की कनेक्टिविटी भी नहीं रहेगी। वहीं ज्यादा हाइट वाली सड़क बनाने से किसानों को खेती के लिए एक तरफ से दूसरी तरफ वाली जमीन पर खेती करने में भी दिक्कतें आएंगी। पानी भराव का खतरा भी बढ़ेगा। इधर, पिछले 2-4 सालों में जमीनों के दाम 2 से 3 करोड़ रुपए बीघा हो गए, लेकिन अधिग्रहण में उन्हें मुआवजा 10-15 लाख रुपए ही दिया जा रहा है।


