नागौर के हरसौर कस्बे में गणतंत्र दिवस से ठीक एक दिन पहले पकडे़ गए 10 टन विस्फोटक के मामले में आरोपी सुलेमान खान NIA और IB सहित देश की सभी सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर आ गया है। 9550 किलो अमोनियम नाइट्रेट की बरामदगी के बाद यह सवाल उठ रहा है कि आखिर सुलेमान खान कौन है? उसके पास इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक कैसे पहुंचा? इन्हीं सवालों के जवाब जानने के लिए भास्कर ने सुलेमान खान देशवाली की क्राइम कुंडली खंगाली। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… सुलेमान खान के पिता का नाम करीम खान है। उसके तीन भाई बक्षु खान, सुल्तान खान और उमर खान हैं। बक्षु खान विदेश में रहता था। हाल में उसका निधन हो गया। उमर ड्राइवरी करता है। सुल्तान अपने बड़े भाई सुलेमान के पास ही रहता है। सुलेमान का बड़ा बेटा जाकिर खान सरपंच कार्यकाल पूरा करने के बाद हरसौर ग्राम पंचायत में प्रशासक के पद पर है। सुलेमान नागौर देशवाली समाज का जिला सदर रह चुका है। इसके अलावा सरपंच का चुनाव भी लड़ चुका है। हरसौर क्षेत्र में ब्लास्टिंग कर अवैध तरीके से पत्थर निकाले जाते हैं। सुलेमान ने अवैध खनन में एंट्री मार ली थी। सुलेमान हरसौर के ही लाइसेंसधारी एक्सप्लोसिव मैगजीन संचालक बलवंत सिंह पुत्र नरेंद्र सिंह राजपूत के यहां काम करने लग गया। बलवंत सिंह के यहां सुलेमान ने विस्फोटक सप्लायरों से भी नजदीकियां बना लीं। विस्फोटक सामग्री को स्टोर करने और सप्लाई करने की टेक्निकल जानकारी भी जुटा ली। इसके बाद इसी लाइसेंसशुदा मैगजीन के जरिए वो अवैध खान में ब्लास्टिंग करने वालों को विस्फोटक बेचने लग गया। इस काम में उसने बलवंत सिंह को भी अपना पार्टनर बना लिया। पहली बार 2014 में खुलासा
जून 2014 में पुलिस ने हरसौर में सुलेमान की ऑटो पाट्र्स की दुकान पर छापा मारा। 18 जून 2014 को थांवला पुलिस को शाम साढ़े 6 बजे सूचना मिली थी कि हरसौर में सुलेमान खान पुत्र करीम खान, जाकिर पुत्र सुलेमान खान व सुल्तान पुत्र करीम खान के पास बड़ी तादाद में अवैध विस्फोटक जमा है। तत्कालीन थांवला एसएचओ ने सुलेमान, सुल्तान और जाकिर के घर, दुकानों और ठिकानों पर रेड कर दी। सबसे पहले पुलिस टीम हरसौर में सुलेमान की केके मशीनरी नाम से बानी ऑटो पाट्र्स की दुकानों पर पहुंची। बाहर सुल्तान खान खड़ा था। पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया और तलाशी के लिए सभी ताले खुलवाए। खौफ इतना था कि कोई पुलिस के लिए स्वतंत्र गवाह बनने को तैयार नहीं हुआ। आखिरकार पुलिस कॉन्स्टेबल को ही स्वतंत्र गवाह बनाकर सुल्तान खान के सामने ही तलाशी ली गई थी। इस दौरान दोनों तहखाने में 17 कट्टे अमोनियम नाइट्रेट काला शोरा (405 किलोग्राम) व 9 कट्टे अमोनियम नाइट्रेट सफेद शोरा (475 किलोग्राम), हरी बत्ती 4 बंडल सेफ्टी फ्यूज, 10 पीस ऑडी खुली टोपी, 102 कार्टून सेफ्टी फ्यूज, 10.5 किलोग्राम प्रति कट्टा मिला। इसके बाद पुलिस टीम हरसौर में एक मजार के सामने बनी सुलेमान खान व उसके बेटे जाकिर खान की दुकानों पर पहुंची। वो दोनों ही मौके पर नहीं मिले। वहां भी पुलिस को बड़ी मात्रा में अवैध विस्फोटक सामग्री मिली। ये भी पता चला कि अवैध विस्फोटक बलवंत सिंह के मैगजीन लाइसेंस की आड़ में अवैध तरीके से खरीदकर ही यहां लाया गया था। बाद में सुलेमान खान, सुल्तान खान और बलवंत सिंह को गिरफ्तार किया गया। जाकिर खान की कोई संलिप्तता पुलिस जांच में सामने नहीं आई थी। फिलहाल इस मामले में कोर्ट में ट्रायल चल रहा है। गिरफ्तारी के कुछ समय बाद ही सुलेमान, सुल्तान और बलवंत सिंह को हाई कोर्ट से बेल मिल गई थी। 2017 में विस्फोट में बाइक सवार के चीथड़े उड़े
जमानत मिलने के बाद एक बार फिर सुलेमान का नाम विस्फोटक मामले में जुड़ा। 27 सितम्बर 2017 के दिन नागौर के पादूकलां थाने से ठीक पहले नेशनल हाईवे पर चलती मोटरसाइकिल में विस्फोट हुआ। धमाके में मोटरसाइकिल चलाने वाले शख्स के चीथड़े उड़ गए। मृतक का नाम मुबारक था। वो जोधपुर से अजमेर दरगाह में जाने के लिए बाइक लेकर निकला था। मोटरसाइकिल में उसने विस्फोटक से भरी थैली लटका रखी थी। तेज गर्मी और साइलेंसर की गर्मी से विस्फोटक ने आग पकड़ ली और धमाका हो गया। मुबारक ने मरने से पहले हरसौर के सुलेमान खान से मोबाइल पर बात की थी। तत्कालीन नागौर SP अनिल पारिस देशमुख की अगुवाई में पुलिस टीम ने सुलेमान खान को गिरफ्तार कर लिया। कोर्ट में चालान भी पेश कर दिया कि मृतक मुबारक के पास जो विस्फोटक बाइक पर ब्लास्ट हुआ था, उसे सुलेमान ने ही सप्लाई किया था। सबूतों के अभाव में सुलेमान को 9 मई 2023 को सेशन कोर्ट से बरी कर दिया गया। इससे पहले 2017 में पादूकलां थाने के पास हुए ब्लास्ट में सुलेमान का नाम सामने आने के बाद तत्कालीन एसएचओ महावीर सिंह ने बलवंत सिंह के मैगजीन लाइसेंस को निरस्त करने के लिए अपनी रिपोर्ट एसपी और अन्य लेवल पर भेज दी थी। इसके बाद सुलेमान खान पर साल 2020 में भी अलवर के थाने में अवैध विस्फोटक सप्लाई करने और बेचने का मामला दर्ज हुआ था, जिसमें अभी भी ट्रायल चल रहा है। बेटा बन गया सरपंच
6 मार्च 2020 को अलवर जिले के और हाल में खैरथल तिजारा जिले में थाना चौपानकी के तत्कालीन एसएचओ मुकेश कुमार को सूचना मिली थी कि एक पिकअप में बाहर से विस्फोटक सामग्री आ रही है। इसके बाद दोपहर करीब 2 बजे एक पिकअप टपूकड़ा की तरफ से आती दिखाई दी। इसको रोकने पर चालक से नाम-पता पूछा एवं गाड़ी को चेक किया तो पिकअप के पीछे बाॅडी में खुली सब्जी भरी पाई गई। चेक किया तो सब्जी के नीचे सफेद रंग के प्लास्टिक के कट्टे भरे दिखाई दिए। इन कट्टों में अमोनियम नाइट्रेट व बारूदी बत्ती डेटोनेटर फ्यूज विस्फोटक सामग्री थी, जो अवैध खनन के लिए पहाड़ों में ब्लास्टिंग करने के काम में लिया जाना बताया गया। इस मामले में पकड़े गए आरोपियों आमीन व महमूद से तलाशी के दौरान 46 कट्टे अमोनियम नाइट्रेट, 8 बंडल डेटोनेटर फ्यूज बरामद हुए थे, जिन्हें रखने के लिए उनके पास कोई लाइसेंस नहीं था। इन्वेस्टिगेशन में पता चला था कि आमीन एवं महमूद द्वारा ये विस्फोटक सुलेमान खान से लाया गया था। इस बीच साल 2021 में सुलेमान का बेटा जाकिर चुनाव जीतकर हरसौर का सरपंच बन गया। इसके बाद सुलेमान ने अपना पॉलिटिकल वर्चस्व बढ़ाना स्टार्ट कर दिया। बड़े पुलिस अधिकारियों व राजनेताओं के साथ सुलेमान की कई फोटो वायरल हैं। सुलेमान और इसके परिवार ने हरसौर सहित आस-पास के इलाके में जंगलों में अपने ठिकाने बना रखे हैं और काफी गौचर व सरकारी जमीन पर कब्जा भी कर रखा है। अब हाल में गणतंत्र दिवस से एक दिन पहले ही नागौर पुलिस ने सुलेमान खान के खेत से 187 कट्टों (बोरियों) में 9,550 किलो अमोनियम नाइट्रेट (विस्फोटक) बरामद किया है। राजस्थान में ये विस्फोटक जब्ती की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई थी। फिलहाल जांच टीमें सुलेमान से पूछताछ करने का प्रयास कर रही हैं कि उसके नेटवर्क में कौन-कौन शामिल हैं। उसे ये सप्लाई कहां से मिल रही है? सुलेमान के अलवर और मेवात कनेक्शन को भी खंगाला जा रहा है।


