328 स्वरूप मामले में सरकार-SGPCआमने-सामने:हाईकोर्ट में जवाबी जंग, सरकार बोली सहयोग अधूरा, एसजीपीसी ने आरोप बताए राजनीति से प्रेरित

328 पावन स्वरूपों के मामले को लेकर पंजाब सरकार और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के बीच टकराव तेज हो गया है। पंजाब सरकार द्वारा पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दाखिल की गई रिट के जवाब में एसजीपीसी ने सरकार के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। सरकार ने अपनी याचिका में दावा किया था कि एसजीपीसी विशेष जांच टीम यानी SIT को पूरा सहयोग नहीं कर रही। इस कारण सभी सवालों के जवाब नहीं मिल पा रहे हैं। एसजीपीसी के कानूनी सलाहकार एडवोकेट अमनबीर सिंह सियाली ने अमृतसर में मीडिया से बातचीत करते हुए सरकार के आरोपों को गलत, बेबुनियाद और राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि सरकार अदालत को गुमराह करने की कोशिश कर रही है। एडवोकेट सियाली ने स्पष्ट किया कि 12 तारीख को जत्थेदार अकाल तख्त साहिब द्वारा दिए गए आदेशों के अनुसार एसजीपीसी ने SIT को हर तरह का सहयोग देने का फैसला किया था और उस आदेश का पूरी तरह पालन किया गया है। उन्होंने बताया कि SIT द्वारा मांगे गए सभी दस्तावेज कैटेगरी वाइज तैयार कर लिए गए थे और उनकी प्रमाणित प्रतियां भी उपलब्ध हैं। SIT से बार-बार संपर्क का दावा एसजीपीसी सचिव द्वारा SIT के चेयरमैन और सदस्यों से कई बार फोन पर संपर्क किया गया और यह जानकारी भी दी गई कि चंडीगढ़ स्थित सब ऑफिस से रिकॉर्ड किसी भी समय प्राप्त किया जा सकता है। एडवोकेट सियाली ने आगे बताया कि 26 तारीख को SIT को लिखित रूप में सूचना पत्र भेजा गया था। इसमें साफ कहा गया था कि सारा रिकॉर्ड तैयार है और 27, 28 व 29 तारीख को एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी की मौजूदगी में रिकॉर्ड लिया जा सकता है। इसके बावजूद SIT द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। एसजीपीसी ने साफ कहा है कि अदालत में यह कहना कि कमेटी सहयोग नहीं कर रही, संस्था की छवि खराब करने की कोशिश है। एसजीपीसी का दावा है कि वह कभी भी जांच से पीछे नहीं हटी और सच्चाई सामने लाने के लिए आगे भी हर तरह का सहयोग करती।

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