नर्मदा घाट के उन बच्चों के लिए गणतंत्र दिवस का दिन यादगार बन गया, जो अब तक रात के अंधेरे में घाट की सीढ़ियों पर पढ़ाई करने को मजबूर थे। इन बच्चों ने कभी सोचा भी नहीं था कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अपने साथी न्यायाधीशों के साथ उनसे मिलने आएंगे। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा, प्रशासनिक न्यायाधीश विवेक रूसिया, जस्टिस विवेक अग्रवाल सहित अन्य न्यायाधीश 26 जनवरी को गौरीघाट पहुंचे। बच्चों से मिलकर उनका उत्साह बढ़ाया और उन्हें 60 टैबलेट के साथ अन्य उपहार भी दिए। बच्चों के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी। घाट की सीढ़ियों पर बैठकर पढ़ते हैं बच्चे करीब दो साल पहले चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा मां नर्मदा के दर्शन के लिए गौरीघाट आए थे। उस दौरान उन्होंने घाट की सीढ़ियों पर आसपास की बस्तियों में रहने वाले बच्चों को पढ़ते देखा। खुले आसमान के नीचे बच्चों को सामान्य ज्ञान और अंग्रेजी पढ़ाते शिक्षक पराग दीवान का समर्पण देखकर चीफ जस्टिस काफी प्रभावित हुए थे। उसी दिन उन्होंने इन बच्चों की शिक्षा को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया था। स्कूल बैग और स्टेशनरी भी दी एक माह पहले गौरीघाट भ्रमण के दौरान चीफ जस्टिस ने बच्चों और बिना किसी सरकारी सहायता के पढ़ा रहे शिक्षक पराग दीवान को गणतंत्र दिवस पर आमंत्रित किया था। इसी क्रम में सोमवार को बच्चों को 60 टैबलेट दिए गए। इसके अलावा 175 बच्चों को स्कूल बैग और स्टेशनरी की जरूरी सामग्री भी वितरित की गई। शिक्षक पराग दीवान को भी उनके नि:शुल्क शिक्षण कार्य के लिए सम्मानित किया गया। ऐसे बच्चों के लिए न्याय पालिका को भी आगे आना चाहिए इस मौके पर चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा ने कहा कि न्याय व्यवस्था को भी ऐसे बच्चों के भविष्य के लिए आगे आकर भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह पहल केवल सहायता नहीं, बल्कि शिक्षा के अधिकार को सम्मान देने की दिशा में एक मजबूत कदम है। चीफ जस्टिस के हस्तक्षेप से गौरीघाट में बच्चों की पढ़ाई के लिए पक्का और सुरक्षित शेड भी स्वीकृत किया गया है। अब बच्चे मौसम की बाधा के बिना नियमित रूप से पढ़ाई कर सकेंगे। यह पहल न सिर्फ बच्चों के लिए नई उम्मीद बनी है, बल्कि समाज के लिए भी एक प्रेरणादायी उदाहरण है।


