ट्रम्प ने इराक से समर्थन वापस लेने की धमकी दी:कहा- नूरी-मलिकी को फिर PM बनाया तो कोई मदद नहीं करेंगे; उसकी नीतियां पागलों वाली

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी है कि अगर इराक पूर्व प्रधानमंत्री नूरी अल-मलिकी को फिर से प्रधानमंत्री बनाता है, तो अमेरिका इराक से अपना समर्थन वापस ले लेगा। ट्रम्प ने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर पोस्ट में लिखा, “मैं सुन रहा हूं कि महान देश इराक बहुत गलत फैसला ले सकता है और नूरी अल-मालिकी को फिर से प्रधानमंत्री बना सकता है।” उन्होंने कहा कि मलिकी के पिछले कार्यकाल में इराक गरीबी और पूरी अराजकता में डूब गया था। ऐसा दोबारा नहीं होने देना चाहिए। ट्रम्प ने आगे कहा कि मलिकी की पागल नीतियों और विचारधारा की वजह से अगर वे चुने गए, तो अमेरिका इराक की मदद नहीं करेगा। बिना अमेरिकी सहायता के इराक के पास सफलता, समृद्धि या आजादी की कोई संभावना नहीं रहेगी। शिया नेता हैं मलिकी, ईरान के करीबी सहयोगी माने जाते मलिकी ने 2006 से 2014 तक इराक के प्रधानमंत्री के रूप में काम किया। माना जाता है कि उनके समय में ही इराक में संप्रदायिक हिंसा, राजनीतिक अस्थिरता और ISIS जैसे उग्रवादी समूहों का उदय हुआ था। इससे पहले रविवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इराकी प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी से फोन पर बात की। रुबियो ने कहा कि वे उम्मीद करते हैं कि अगली सरकार मिडिल ईस्ट में शांति लेकर आए। मलिकी शिया नेता हैं और ईरान के सबसे करीबी सहयोगी माने जाते हैं। ट्रम्प ईरान को अपना बड़ा दुश्मन मानता है। उनको डर है कि मलिकी की वापसी से इराक में ईरान का प्रभाव और बढ़ जाएगा। इराक में प्रधानमंत्री पद पर अटका विवाद इराक में संसदीय चुनाव 11 नवंबर 2025 को हो चुके हैं। यह इराक के 329 सदस्यों वाली संसद के लिए चुनाव था, जो राष्ट्रपति चुनती है और फिर प्रधानमंत्री की नियुक्ति होती है। प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी की गठबंधन ने सबसे ज्यादा सीटें जीतीं (लगभग 46 सीटें), लेकिन कोई भी गठबंधन बहुमत में नहीं आया। इसलिए सरकार बनाने के लिए गठबंधन और बातचीत चल रही है। राष्ट्रपति चुनाव 28 या 29 जनवरी 2026 को निर्धारित था, लेकिन कुर्द ब्लॉक्स में उम्मीदवार पर सहमति न होने से इसे टाल दिया गया है। शिया गठबंधन ने 24 जनवरी 2026 को पूर्व प्रधानमंत्री मलिकी को प्रधानमंत्री पद के लिए नामित किया है, जिस पर अमेरिका ने नाराजगी जताई है। मलिकी ने ही सद्दाम हुसैन की फांसी को मंजूरी दी थी मलिकी इराक के इस्लामिक पार्टी के लंबे समय से नेता रहे हैं। वे 2006 से 2014 तक इराक के प्रधानमंत्री रहे, जो पोस्ट-सद्दाम हुसैन युग में सबसे लंबा कार्यकाल है। उन्होंने दो टर्म पूरे किए। 2003 में अमेरिका के नेतृत्व में सद्दाम हुसैन की सत्ता समाप्त होने के बाद इराक में अराजकता और संप्रदायिक हिंसा बढ़ गई थी। 2006 में इब्राहिम अल-जाफरी के इस्तीफे के बाद मलिकी को समझौते के तौर पर प्रधानमंत्री चुना गया। शुरुआत में उन्होंने राष्ट्रीय एकता सरकार बनाई, जिसमें शिया, सुन्नी और कुर्द शामिल थे। 2006 में ही मलिकी ने सद्दाम हुसैन की फांसी को मंजूरी दी। 2007-2008 में अमेरिकी सैनिकों की बढ़ोतरी के साथ मिलकर उन्होंने अल-कायदा इन इराक और शिया मिलिशिया के खिलाफ कार्रवाई की। 2008 में मिलिशिया के खिलाफ ऑपरेशन खुद लीड किया, जिसे सफल माना गया। मलिकी पर भ्रष्टाचार और नेपोटिज्म के आरोप लग चुके इराक के आलोचकों का कहना है कि उन्होंने शिया समूहों को ज्यादा ताकत दी। सुन्नी कुर्दों को पीछे धकेल दिया, जिससे सुन्नी समुदाय में असंतोष बढ़ा, जो बाद में ISIS के उदय का कारण बना। उन्होंने सेना, पुलिस और न्यायपालिका में अपने वफादारों को जगह दी। उनपर भ्रष्टाचार और नेपोटिज्म के आरोप लगे। विपक्षियों को दबाने के लिए कानूनों का इस्तेमाल किया। ईरान के साथ मजबूत संबंधों के कारण अमेरिका और सुन्नी समूहों में असंतोष रहा। 2014 में संसदीय चुनाव जीतने के बावजूद दबाव में इस्तीफा देना पड़ा और हैदर अल-अबादी प्रधानमंत्री बने। इराक को सुरक्षा सहायता देता है अमेरिका अमेरिका इराक को कई तरह का समर्थन देता है। जिसमें सुरक्षा, आर्थिक विकास, मानवीय सहायता और राजनीतिक स्थिरता शामिल है। अमेरिका-इराक स्टैटीजिक फ्रेमवर्क एग्रीमेंट एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय समझौता है, जो 2008 में जॉर्ज डब्ल्यू. बुश प्रशासन और इराकी सरकार ( तत्काल प्रधानमंत्री नूरी अल-मालिकी) के बीच हुआ था। इसपर नवंबर 2008 में हस्ताक्षर किया गया और जनवरी 2009 से लागू हुआ। यह समर्थन अमेरिका-इराक स्टैटीजिक फ्रेमवर्क एग्रीमेंट के तहत चलता है। 2026 में ट्रम्प प्रशासन के समय इसे कुछ शर्तों के साथ जारी किया गया।

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