यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता संवर्द्धन विनियम 2026 में बदलाव की मांग को लेकर राष्ट्रपति के नाम सिकराय एसडीएम डॉ नवनीत कुमार को ज्ञापन सौंपा। जिसमें बताया कि यूजीसी विनियम 2026 के नियम संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता के अधिकार) के विपरीत है तथा यह नियम वर्षों से चले आ रहे शैक्षणिक संतुलन को बिगाड सकता है। इसमें सामान्य वर्ग के छात्रों को हाशिये पर धकेलने का खतरा है। यह नियम शिक्षा में समानता और भेदभाव मुक्त वातावरण के उद्देश्य से लागू करने की मंशा रही होगी, लेकिन इसके दुरूपयोग होने व फर्जी शिकायतों से निरपराध छात्रों के प्रताडित होने की पूरी आशंका व संभावना है। नियमों में संसोधन की मांग ज्ञापन में बताया कि किसी भी नियम या कानून में न्याय, संतुलन और सभी वर्गों की समान सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार और संस्थाओं की संवैधानिक जिम्मेदारी है। ऐसी सूरत में जातिगत भेदभाव को एकजुटता से रोका जाना चाहिए एवं यह काम साफ नियत से करना चाहिए ना कि सियासी नजरिये से। इस कानून से देश की आने वाली पीढी दिशाहीन हो जाएगी और निश्चित दुरूपयोग होगा। इससे पीडित वर्ग सिर्फ सवर्ण होगा जो इन झूठे अपराध का आरोप लगने से स्वयं को कुठिंत महसूस कर अपने मार्ग से विमुख हो जाएगा, युवा छात्रों में अकारण ही आंदोलित होने की संभावना बढेगी। ज्ञापन में मांग की गई कि सामान्य वर्ग की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए एवं संविधान की आत्मा पर प्रभाव डालने वाले एवं छात्रों में जातिगत वैमनस्यता बढाने वाले इस नियम को वापस लेने या नियमानुसार जांच कमेटी बनाकर, उसमें सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों को रखा जाकर पारदर्शिता रखकर संशोधन करवाया जाना चाहिए।


