आज विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत में राज्यपाल के अभिभाषण से शेखावाटी वासियों के लिए खुशखबरी आई है। अभिभाषण में राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने कहा कि यमुना जल लाने की डीपीआर अंतिम चरण में है। राज्यपाल ने अभिभाषण के दौरान नहरी तंत्र पर बोलते हुए ये बात कही। यमुना जल का सीधा फायदा शेखावाटी के तीनों जिलों होने की उम्मीद है। यमुना जल का पानी शेखावाटी में आने से खेती में क्रांति आ सकती है, क्योंकि शेखावाटी इलाका अभी तक बरसात और सीमित नहरों पर निर्भर है। यमुना जल का पानी मिलने से कृषि और उद्योगों के साथ ही आमजन को पेयजल के लिए भी पानी मिलेगा। अभी सीकर, चुरू और झुंझुनूं जिले के अधिकांश इलाकों में या तो फ्लोराइड युक्त जल है या फिर जल स्तर 1000 फीट से भी ज्यादा नीचे चला गया है। राजस्थान में काफी समय से नहरी पानी की मांग की जा रही है। पिछले 4 दशकों से शेखावाटी में यमुना जल का पानी चुनावों का बड़ा मुद्दा भी रहा है। राजस्थान में लंबे समय से पेयजल संकट रहा है। शेखावाटी इलाके में खनन की वजह से पेयजल स्तर काफी नीचे चला गया है। शेखावाटी के लिए यमुना जल समझौता 1994 में हुआ था। लेकिन अभी तक ये धरातल पर नहीं उतरा है। वर्तमान राजस्थान सरकार ने हरियाणा सरकार और केंद्र सरकार के साथ मिलकर यमुना जल समझौते को लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं।
1994 से अटका शेखावाटी के हक का पानी
यमुना जल समझौता मई 1994 में तत्कालीन केंद्र सरकार की पहल पर 5 राज्यों राजस्थान, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली के बीच हुआ था, इस समझौते के अनुसार राजस्थान को हर साल मानसून के 4 महीनों में ताजेवाला हैड (अब हथनीकुंड बैराज) से 1917 क्यूसेक यमुना का पानी दिया जाना तय हुआ था।


