वन विहार को वन्य प्राणी एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत सिंहों का एक जोड़ा मिल गया है। इसके बाद इनके ब्रीडिंग प्रोग्राम की नई उम्मीद जागी है। वन विहार में दो मादा और एक नर पहले से हैं। नया जोड़ा आने के बाद विभाग इनकी ब्रीडिंग को लेकर उत्साहित है। ब्रीडिंग के बाद वह इन्हें पन्ना टाइगर रिजर्व में हुए बाघाें के पुनर्वास की तर्ज पर खुले जंगल में छोड़ेगा। गौरतलब है कि एक समय बाघों से शून्य हो चुके पन्ना टाइगर रिजर्व में आज इनकी संख्या करीब 90 है। इससे पहले वन विभाग चीता और लुप्तप्राय हार्ड ग्राउंड बारहसिंगा को सफलतापूर्वक पुनर्वासित कर चुका है। वन विहार में अभी जो 5 सिंह हैं, इनमें दो मादा और एक नर चिड़ियाघर में पैदा हुए थे। तीनों के पैरेंटल सिंह भी चिड़ियाघर में पैदा हुए थे, इसलिए इनके साथ ब्रीडिंग प्रोग्राम आगे नहीं बढ़ पाया। वन विहार के डिप्टी डायरेक्टर सुनील सिन्हा ने बताया कि गुजरात से आए नए जोड़े के पैरेंट गिर के जंगल से रेस्क्यू किए गए थे। इसलिए इनमें वाइल्ड डीएनए मौजूद है। इनकी ब्रीडिंग से उत्पन्न शावकों को ट्रेंड करके खुले जंगल में छोड़ा जाएगा। पन्ना प्रोजेक्ट की सक्सेस स्टोरी 1. पन्ना टाइगर रिजर्व में 2009 से 2014 तक फील्ड डायरेक्टर रहे आर श्रीनिवास मूर्ति के मुताबिक 2008 में यह पार्क बाघविहीन हो गया था। इसके बाद सरकार ने पार्क को बाघों से पुनर्वासित करने का निर्णय लिया। 2. कान्हा टाइगर रिजर्व की एक बाघिन हेलीकॉप्टर से पन्ना लाई गई। पेंच से एक युवा नर बाघ टी-3 लाया गया। इसके बाद कान्हा से दो बाघिनों को पन्ना लाए। आज पन्ना में 90 बाघ हैं। इनमें 48 वयस्क हैं।


