डीडवाना में UGC नियमों के खिलाफ मौन प्रदर्शन:कहा- पहले धर्म के नाम पर समाज को बांटा गया, अब युवाओं का उलझाने की कोशिश

डीडवाना कलेक्ट्रेट परिसर में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा (सिंगरामऊ) ने UGC के ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस 2026’ के विरोध में मौन प्रदर्शन किया। प्रदेशाध्यक्ष दलपत सिंह गच्छीपुरा के नेतृत्व में बुधवार को हुए इस प्रदर्शन में महासभा के पदाधिकारियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रदर्शन के बाद कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर इन नियमों को तत्काल वापस लेने की मांग की गई। ज्ञापन में महासभा ने आरोप लगाया कि UGC के प्रस्तावित नियम संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 की मूल भावना के विपरीत हैं। असुरक्षा और अन्याय की भावना बढ़ रही
संगठन के अनुसार 15 जनवरी 2026 से लागू होने वाले ये प्रावधान उच्च शिक्षा में समानता के बजाय असमानता को बढ़ावा देंगे और समाज को वर्गों में विभाजित करेंगे। महासभा ने इसे सामान्य वर्ग के छात्रों के अधिकारों पर सीधा आघात बताया, जिससे उनमें असुरक्षा और अन्याय की भावना बढ़ रही है। ध्यान भटकाने के लिए नए नियम लाए गए
प्रदेशाध्यक्ष दलपत सिंह गच्छीपुरा ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार उत्तर प्रदेश में चल रहे शंकराचार्य विवाद से जनता का ध्यान भटकाने के लिए ये नए नियम लाई है। गच्छीपुरा ने आरोप लगाया कि आगामी चुनावों को देखते हुए समाज को वर्गों में बांटकर राजनीतिक लाभ लेने की सुनियोजित कोशिश की जा रही है। पहले धर्म के नाम पर समाज को बांटा गया
दलपत सिंह ने दावा किया कि पहले धर्म के नाम पर समाज को बांटा गया, और अब युवाओं को वर्गों में उलझाने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने नेपाल और बांग्लादेश में Gen-Z युवाओं के विरोध प्रदर्शनों का हवाला देते हुए कहा कि सत्ताधारी वर्ग इससे भयभीत है और इसी डर के कारण युवाओं को आपस में उलझाकर अपने स्वार्थ साधने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रदेशाध्यक्ष ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इन नियमों को वापस नहीं लिया, तो महासभा पूरे प्रदेश के जिला मुख्यालयों पर आंदोलन तेज करेगी। विशाल प्रदर्शन की दी चेतावनी
युवा नेता भरत सिंह ने भी आंदोलन जारी रखने की घोषणा करते हुए कहा कि आने वाले दिनों में डीडवाना मुख्यालय पर एक विशाल प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। प्रदर्शन में महेश सिंह बरनेल, राजपाल सिंह, नरपत सिंह हिराणी, दिलीप सिंह हिराणी, सुरेंद्र सिंह चितावा, भरत सिंह कुडली, धीरेन्द्र सिंह थानू, नरेंद्र सिंह देवराठी सहित बड़ी संख्या में समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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