त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया सोमवार को पूरी हो गई। जिला पंचायत के 12 क्षेत्रों के लिए 111 प्रत्याशियों ने 123 नामांकन दाखिल किए गए हैं। सबसे अधिक जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक 4 से 18 नामांकन दाखिल हुए हैं। जनपद के 114 क्षेत्रों के लिए 380 और सरपंच ,पंच के लिए 410 पंचायतों के लिए 13 हजार से अधिक से अधिक नामांकन जमा किए गए हैं। नामांकन पत्रों की जांच 4 फरवरी को होगी। 6 फरवरी तक नाम वापस ले सकेंगे। इसी दिन चुनाव चिन्ह का आवंटन हो जाएगा। नगरीय निकाय के बाद पंचायत चुनाव के लिए भी नामांकन जमा करने सोमवार को गहमागहमी रही। जिला पंचायत के 7 क्षेत्र इस बार आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित हैं। 4 सीट सामान्य है । जिसमें से क्षेत्र क्रमांक 4 और 6 सामान्य मुक्त है। दोनों ही स्थानों में दावेदारों की संख्या अधिक है। अंतिम दिन जिला पंचायत में नामांकन जमा करने के लिए गहमागहमी का माहौल रहा। पंचायत चुनाव दलीय आधार पर नहीं होता है। इसके बाद भी भाजपा और कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी उतारते हैं। पांचों ब्लॉक में जनपद सदस्य के 114 क्षेत्र हैं। जहां नामांकन जमा करने के लिए भारी भीड़ रही।
पंच के 6118 और सरपंच 410 पदों के लिए सेक्टर के आधार पर नामांकन की सुविधा दी गई थी। एक पंचायत में इस बार 3 से 4 प्रत्याशी मैदान में हैं। इस वजह से इनकी संख्या 13 हजार से अधिक पहुंच गई है। सरपंच का पद आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित है। जिसमें से 205 क्षेत्र आदिवासी महिला के लिए सुरक्षित रखा गया है। नामांकन पत्रों की जांच के बाद मंगलवार को प्रत्याशियों की संख्या साफ होगी। इसके साथ ही नाम वापसी तक कई क्षेत्रों में इस बार भी निर्विरोध निर्वाचन हो सकता है। पंच के लिए भी यही स्थिति है। उप सरपंच चुनाव लड़ने के लिए पंच बनने सबसे अधिक नामांकन जमा करते हैं। जिला पंचायत के चुनाव में पूर्व विधायक अपने परिजनों को मैदान में उतर रहे हैं। पूर्व विधायक श्यामलाल कंवर अपनी पत्नी सरोज देवी को चुनाव लड़ा रहे हैं। पूर्व विधायक ननकी राम कंवर अपनी बहू निर्मला कंवर और पूर्व विधायक मोहित राम अपने पुत्र शंकर केरकेट्टा को चुनाव लड़ा रहे हैं। विधायक फूल सिंह राठिया की बहू कमला राठिया भी जिला पंचायत सदस्य हैं। इस बार फिर मैदान में होगी। पंचायत चुनाव में इस बार कई दिक्कत चुनाव मैदान में नहीं होंगे। जिनमें पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष अजय जायसवाल, रीना जायसवाल, मदन राठौर व मीरा कंवर भी शामिल हैं। इसी तरह शकुंतला कंवर भी इस बार मैदान में नहीं होगी। इसी वजह से कई क्षेत्रों में नए प्रत्याशी नामांकन भरने के लिए आगे आए हैं। जिपं अध्यक्ष का पद आदिवासी मुक्त होने से दावेदारों की संख्या बढ़ गई जिला पंचायत अध्यक्ष का पद आदिवासी मुक्त है। हालांकि जिला पंचायत में 7 क्षेत्र में महिलाएं ही चुनकर आएंगी । 5 पुरुष दावेदारों में से 3 आदिवासी वर्ग से होंगे। इनके बीच से ही अध्यक्ष के लिए घमासान हो सकता है। यह भी कहा जा रहा है कि महिला अध्यक्ष फिर इस बार बन सकती है। दोनों ही दलों की अध्यक्ष पद पर नजर बनी हुई है।


