आज खत्म होगी रिमांड:एक ही दिन हिरासत में आए सौरभ-चेतन-शरद के जवाब ऐसे मानो पहले कई दिनों तक साथ में सवालों की तैयारी करवाई गई हो

परिवहन विभाग की काली कमाई से धनकुबेर बने पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा और सहयोगियों चेतन सिंह गौर व शरद जायसवाल की पुलिस रिमांड मंगलवार को पूरी हो रही है। सोमवार को भी इनसे तीन घंटे पूछताछ हुई, लेकिन 6 दिन की पूछताछ में लोकायुक्त पुलिस के हाथ लगभग खाली हैं। तीनों ही ऐसे जवाब दे रहे हैं, जैसे पहले से ही तैयारी कर रखी हो। लोकायुक्त पुलिस जांच में सहयोग नहीं करने और कई सवालों के जवाब लेने के लिए तीनों की रिमांड अवधि बढ़ाने की मांग कर सकती है। पुलिस के विशेषज्ञों का भी मानना है कि तीनों ने पहले से ही पुख्ता तैयारी की है, जिससे उन्हें किसी सवाल में उलझाया नहीं जा सके। इधर, कोर्ट में आरोपियों द्वारा जान का खतरा बताने के बाद रोज मेडिकल जांच का कवच मिलने से लोकायुक्त पुलिस पूछताछ में सख्ती बरतने से बच रही है। तीनों इसका फायदा उठा रहे हैं। जिन सवालों को पुख्ता करने के लिए दस्तावेज पेश किए गए, उन पर तीनों चुप्पी साध लेते हैं। 6 दिन की रिमांड के बाद भी लोकायुक्त पुलिस के हाथ नहीं लगी कोई ठोस जानकारी इन सवालों के जवाब नहीं…. 52 किलो सोना किसका, बेनामी संपत्ति का असली मालिक कौन लोकायुक्त पुलिस के छापे के बाद सौरभ और उसकी पत्नी दिव्या तिवारी 40 दिन तक कहां रहे?
-सौरभ इस पर अलग-अलग बयान दे रहा है। पहले बोला कि वह दुबई से वापस आने के बाद दिल्ली और आसपास के शहरों में रहा, फिर कहने लगा कि उत्तराखंड के अलग-अलग शहरों में रहा। बता दें, सौरभ के ग्वालियर में दो दिन रुकने की बात भी सामने आई है, पर सौरभ इस पर चुप्पी साधे है। मेंडोरी गांव के खाली प्लॉट से बरामद कार से मिला 52 किलो सोना और 11 करोड़ रुपए नकदी किसके हैं?
-चेतन का कहना है कि ये कार उसके नाम पर है, पर इसे सौरभ ने खरीदा है। डाउन पेमेंट सौरभ ने ही दी थी। बैंक की ईएमआई दो दिन पहले सौरभ उसके खाते में डलवाता था। वहीं, सौरभ का कहना है कि कार चेतन के नाम पर है। मुझे इस बारे में कुछ नहीं पता कि इसमें सोना और कैश किसका था। शरद का कहना है कि वो इस बारे में कुछ नहीं जानता। अविरल कंस्ट्रक्शन कंपनी के जरिए प्राॅपर्टी की खरीदारी में किसने रुपए दिए और ये कहां से आए? सौरभ के घर से मिले प्रॉपर्टी के दस्तावेजों का असली मालिक कौन है?
-शरद और चेतन ने खुद को सौरभ का कर्मचारी बताया है। शरद का कहना है कि वह सौरभ को तीन साल से जानता है। वह उसके साथ प्रॉपर्टी का काम कर रहा था। इसी के चलते उसे अविरल कंपनी में डायरेक्टर बनाया गया। चेतन का कहना है कि उसे इस बारे में कुछ नहीं पता है। सौरभ ने बताया कि उसके नाम पर कोई प्रॉपर्टी नहीं है, जिन बेनामी संपत्तियों की बात पूछी जा रही है, वो उनके बारे में कुछ भी नहीं जानता। छापे में घर और ऑफिस से जब्त चांदी, नकदी, करोड़ों की संपत्ति किसकी है और इसे कैसे जुटाया गया? परिवहन विभाग की सीलें व खाली रसीद कट्‌टे कहां से आए?
-सौरभ ने कहा कि उसे इस बारे में कुछ नहीं पता है। कार्रवाई के दौरान वह भोपाल में नहीं था। चेतन और शरद भी इस मामले से पल्ला झाड़ रहे हैं। शरद का कहना है कि उसके यहां लोकायुक्त पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है, ईडी को भी कुछ नहीं मिला। परिवहन विभाग के नाकों से कैसे उगाही की जाती थी, इससे होने वाली कमाई से कहां-कहां प्रॉपर्टी खरीदी गई हैं?
– सौरभ ने इस सवाल पर चुप्पी साध रखी है। सौरभ के मुताबिक उसके नाम पर प्रॉपर्टी नहीं हैं, जिनके नाम पर हैं, वही बेहतर बता सकते हैं। चेतन और शरद कहते हैं कि हम तो सिर्फ कर्मचारी हैं। राजघाट में मछली का ठेका कब से चल रहा है, इसके लिए राशि कहां से आई, ठेका लेने में किसने सहयोग किया?
– सौरभ बोला कि ये चेतन के नाम पर है, वही इसके बारे में जानता है। चेतन ने कहा कि ये ठेका तीन साल पहले लिया था। इससे ज्यादा नहीं पता। इधर, ईडी और आयकर के संपर्क में लोकायुक्त पुलिस लोकायुक्त पुलिस सौरभ, चेतन और शरद से पूछताछ के साथ प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग से संपर्क में है। आयकर विभाग ने मेंडोरी गांव से सोना और नकदी जब्त की, और कुछ आरोपियों से पूछताछ की। ईडी ने कई लोगों के यहां कार्रवाई की है, और अब पूछताछ की तैयारी है। अविरल कंस्ट्रक्शन के तीसरे डायरेक्टर को छोड़ा लोकायुक्त पुलिस ने अविरल कंस्ट्रक्शन के दो डायरेक्टर शरद और चेतन सिंह को गिरफ्तार किया, जबकि तीसरे अतिरिक्त डायरेक्टर रोहित तिवारी को फिलहाल छोड़ दिया गया। उनके जबलपुर स्थित ठिकानों पर ईडी ने छापा मारा था। एफआईआर में भोपाल में खुल रहे स्कूल में सौरभ की मां उमा शर्मा और पत्नी दिव्या तिवारी को पदाधिकारी बताया गया है, लेकिन अभी उन्हें आरोपी नहीं बनाया गया।

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