उदयपुर के महाराणा भूपाल हॉस्पिटल के कैंसर विभाग में मरीजों के लिए म्यूजिक थेरेपी और साइकॉलोजिकल थैरेपी शुरू की गई है। जिसके तहत मरीजों के लिए आध्यात्मिक, प्रकृति, शास्त्रीय संगीत जैसे सॉफ्ट म्यूजिक बजाए जा रहे हैं। वहीं, साइकोलॉजिकल थैरेपी के लिए थर्ड प्लानेट फाउंडेशन संस्था की मदद ली गई है। इसके लिए साइकोलॉजिकल काउंसलर हर मरीज व उनके परिवार की नि:शुल्क काउंसलिंग कर रहे हैं। इस अनूठी पहल का मुख्य उद्देश्य मरीजों का शारीरिक के साथ मानसिक तनाव कम करना है। डॉक्टरों का कहना है कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से ज्यादातर मरीज गहरी चिंता और तनाव में आ जाते हैं इसी चिंता से मरीज की हिम्मत पूरी तरह टूट सी जाती है। ऐसे में म्यूजिक थैरेपी और साइकॉलोजिकल थैरेपी शुरू की गई है। वार्ड में 20 स्पीकर लगाए, आध्यात्मिक-शास्त्रीय संगीत बजा रहे
म्यूजिक थैरेपी के तहत पहले चरण में कैंसर विभाग के कैंसर वार्ड, वेटिंग एरिया, डे-केयर, रेडिएशन मनीश एरिया, आॅपरेशन थिएटर, रजिस्ट्रेशन एरिया आदि जगहों पर करीब 20 स्पीकर इंस्टॉल किए गए हैं। इनमें आध्यात्मिक, प्रकृति, शास्त्रीय संगीत जैसे सॉफ्ट म्यूजिक बजाए जा रहे हैं। साथ ही साइकोलॉजिकल काउंसलर हर मरीज व उनके परिवार की नि:शुल्क काउंसलिंग कर रहे हैं। म्युजिक थैरेपी से मन को मिलती शांति: डॉ राठौड़
कैंसर रोक विभागाध्यक्ष व प्रोफेसर डॉ नरेन्द्र राठौड़ बताते हैं कि कैंसर का पता चलते ही मरीज के साथ पूरे परिवार में तनाव बढ़ जाता है। इलाज भी लंबे समय तक चलता है। मरीज के साथ परिवार को भी तनाव से गुजरना पड़ता है। विशेषज्ञ मरीजों की बीमारी का तो इलाज कर देते हैं लेकिन उनके तनाव प्रबंधन नहीं कर पाते हैं। यह तनाव कई बार एंग्जायटीख् डिप्रेशन के साथ गंभीर हो जाता है। इसी से निबटने के लिए यह प्रयास शुरू किए हैं। म्यूजिक थैरेपी के तहत ये कर रहे
कैंसर मरीजों व परिजनों के बैठने आदि जगहों पर थोड़ी-थोड़ी देर के लिए मधुर संगीत बजाया जाता है। संगीत से मन शांत और खुशी की अनुभूति होती है। स्ट्रेस कम होता है। इसी तरह संगीत सुनने से न केवल मरीज का मूड बेहतर बनाने में मदद मिलती है। बल्कि तनाव, दर्द और चिंता का स्तर भी कम होता है। साइकोलॉजी थैरेपी के तहत ये कर रहे
अभी तक करीब 150 मरीजों की काउंसलिंग की जा चुकी है। ज्यादातर में तनाव और डिप्रेशन पाया गया है। अब इन्हें इससे निबटने के लिए मदद की जा रही है। साइकोलॉजी थेरेपी में मरीज को अपने विचारों, भावनाओं, और मूड पर नियंत्रण करने और उन्हें समझने में मदद करते है। इस थैरेपी से मरीज की चिंता कम होती है। मूड स्विंग या व्यवहार से जुड़ी परेशानियां कम होती है और आत्मविश्वास बढ़ता है।


