नर्मदा जयंती पर वेदगर्भा घाट का हुआ लोकार्पण:सीएम ने करोड़ों के विकास कार्यों का किया शिलान्यास, विद्यापीठम के बटुकों ने दिखाया मल्लखंभ

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नर्मदा जयंती पर हरदा जिले के ग्राम छिपानेर स्थित चिचोट कुटी में कुल 316.20 करोड़ क लागत के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि पूजन किया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण द्वारा 11.07 करोड़ की लागत से निर्मित वेदगर्भा घाट का लोकार्पण रहा। वैदिक विद्यापीठम के 24 एकड़ क्षेत्र में फैले गुरुकुल परिसर में आयोजित कार्यक्रम में सनातन संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। ब्राजील से आए एरिस्टो प्रेम कुमार ने संस्कृत मंत्रों का उच्चारण किया, जबकि विद्यापीठ के बटुकों ने मल्लखंभ के करतब दिखाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में आरएसएस के सुरेश सोनी और प्रदेश के सहकारिता एवं खेल मंत्री विश्वास सारंग भी मौजूद रहे। तस्वीरों में देखें कार्यक्रम की झलकियां… जानें कैसा है गुरुकुल 2014 में स्थापित इस गुरुकुल में शुरुआती 8 बटुकों की संख्या बढ़कर अब 122 हो गई है, जहां चारों वेदों की सात शाखाओं का निःशुल्क अध्ययन कराया जा रहा है। इसके परिसर में यज्ञशाला, भोजनशाला, गोशाला और छात्रावास के लिए सोलर युक्त लगभग 6 हजार वर्गफीट के 10 पिरामिड आकार के भवन हैं। नर्मदा तट पर स्थित इस विद्यापीठ में 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वेदगर्भा घाट का भूमिपूजन किया था। स्वामी तिलक वैदिक विद्या समिति के मार्गदर्शक निरंजन शर्मा के अनुसार, यह परियोजना विद्या भारती और संस्कृत भारती के संयुक्त प्रयास का परिणाम है। यहां पर चार वेद की 7 शाखाओं का संचालन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि स्वामी तिलक जी की संकल्पना थी कि एक गुरुकुल ऐसा स्थापित हो जहां पर वेद आधारित शिक्षा का अध्यापन किया जा सके। शर्मा ने बताया कि स्वामी तिलक जी द्वारा 1974 में ब्राजील में एक ज्ञान मंदिर की स्थापना की गई थी। 50 साल पूरे होने पर बीते साल वहां स्वर्ण जयंती वर्ष का उत्सव मनाया गया। ऊर्जा के लिए यहां पर करीब 180 किलोवाट का सौर ऊर्जा प्लांट लगाया गया है। जिससे बिजली की खपत बहुत कम हो गई है। बल्कि बिजली विभाग को सरप्लस बिजली बेची जा रही है। सत्य की खोज में निकले, चिचोट रुके शर्मा ने बताया कि स्वामी तिलक जी को वैराग्य हो गया था और वह सत्य की खोज में मां नर्मदा के किनारे किनारे चलते जा रहे थे। इसी दौरान वह अचानक बजरंगदास बाबा के आश्रम पहुंचे और यहीं पर रुक गए। बजरंगदास बाबा के आदेश पर 3 साल में भारत भ्रमण किया और केरल में उनसे नित्यचैतन्य दास महाराज की मुलाकात हुई। ऐसा बताते हैं कि स्वामी तिलक जी ज्ञान योग, बाबा बजरंग दास भक्ति योग और नित्य चेतन दास महाराज कर्मयोगी थे। इन तीनों के त्रिवेणी संगम से हरदा में वैदिक शिक्षा के लिए गुरुकुल स्थापित हुआ। 24 एकड़ भूमि दान स्वामी नित्यचैतन्यदास महाराज, चिचोटकुटी द्वारा स्वामी तिलक जी के विचारों और इच्छाओं की परिपुष्टता में विद्याभारती को शिक्षा कार्य हेतु 24 एकड़ भूमि आश्रम की दान स्वरूप प्रदान की गई है। इस भूमि पर वर्तमान में एक वृहद यज्ञशाला, तात्कालिक भोजन शाला और गोशाला सहित विद्यार्थियों की आवास व्यवस्था है। जिनमें प्रत्येक भवन में 4 प्रकोष्ठ हैं। इस प्रकार 40 प्रकोष्ठ और 10 सुविधा घर हैं। यहीं पर वृहद कार्यक्रमों के लिए नटराज प्रेक्षागृह (ऑडिटोरियम) एवं ध्यान केन्द्र भी निर्मित हैं। भविष्य की योजनाओं में यहां पर भोजनालय एवं सभागार, छात्रावास, अतिथि आवास, आचार्य आवास, कर्मचारी आवास, बृहद् पुस्तकालय एवं वाचनालय, विविध खेल मैदान, गोशाला, मंदिर, जैविक कृषि प्रशिक्षण एवं अनुसंधान केन्द्र, ग्रहगणना के लिए तारामण्डल व यंत्रों का निर्माण, वैदिक विश्वविद्यालय की स्थापना, वैदिक अनुसंधान केन्द्र, आयुर्वेदिक चिकित्सालय, पंचकर्म एवं योग केन्द्र, धनुर्वेद गुरुकुल, संगीत महाविद्यालय, आयुर्वेद विश्वविद्यालय की स्थापना की जाना है।

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