डूंगरपुर में भाजपा जिलाध्यक्ष की नियुक्ति अभी तक नहीं हो पाई है, जबकि राजस्थान के अन्य जिलों में यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। जिले में 28 नेताओं ने इस पद के लिए दावेदारी पेश की है, जिसमें वर्तमान जिलाध्यक्ष हरीश पाटीदार भी शामिल हैं। पूर्व जिलाध्यक्ष प्रभु पंड्या सहित कई पूर्व पदाधिकारी और भाजयुमो के नेता भी इस रेस में हैं। संगठन स्तर पर कई बैठकें हो चुकी हैं और चुनाव प्रभारी नारायणलाल भी इस मुद्दे पर विचार-विमर्श कर चुके हैं, लेकिन किसी एक नाम पर सहमति नहीं बन पा रही है। जिले के प्रमुख नेता अपने-अपने पसंदीदा उम्मीदवारों को आगे बढ़ाने की कोशिश में लगे हैं। डूंगरपुर एक आदिवासी बहुल क्षेत्र है, जहां सरपंच से लेकर विधायक और सांसद तक के पद एसटी श्रेणी के लिए आरक्षित हैं। ऐसे में संगठन में जिलाध्यक्ष जैसे पदों पर सामान्य और ओबीसी वर्ग को प्रतिनिधित्व दिया जाता रहा है। वर्तमान में ओबीसी वर्ग से जिलाध्यक्ष हैं। प्रदेश के अन्य जिलों में युवा नेतृत्व को तरजीह दी जा रही है। इसी कड़ी में डूंगरपुर में भी भाजपा युवा मोर्चा के पूर्व जिलाध्यक्ष पंकज जैन, राजीव चौबीसा, दीनदयाल सिंह और दिलीप जैन जैसे युवा नेता भी दावेदारी कर रहे हैं। पार्टी जातीय समीकरण और युवा नेतृत्व के बीच संतुलन बनाने की कोशिश में है। मंडल अध्यक्षों को पाले में करने में जुटे
भाजपा जिलाध्यक्ष के पद को लेकर चुनाव को नौबत आई तो मंडल अध्यक्षों को साधने के प्रयास भी शुरू हो गए हैं। सागवाड़ा क्षेत्र के एक बड़े नेता और जिलाध्यक्ष की दौड़ में शामिल पदाधिकारी ने मंडल अध्यक्षों को बुलाकर बैठक ली। जिसमें सभी मंडल अध्यक्षों को अपने पक्ष में करने का प्रयास किया, लेकिन मामला सामने आने के बाद भाजपा में अन्दर खाने खींचतान बढ़ गई, हालांकि जिलाध्यक्ष को लेकर सभी दावेदार अपने अपने दांवपेंच चल रहे हैं।


